लोकसभा चुनाव में टिकट कटने से नाराज भाजपा के हरदोई सांसद अंशुल वर्मा ने बुधवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में जाकर उन्होंने वहां तैनात चौकीदार को अपना त्यागपत्र सौंपा। बीते दिनों घोषित प्रत्याशियों की सूची में हरदोई सांसद अंशुल वर्मा का नाम कटा था। उनके स्थान पर जय प्रकाश रावत को टिकट दिया गया है। इसके बाद से ही पार्टी में घमासान चल रहा था। बुधवार को सांसद अंशुल वर्मा लखनऊ पहुंचे। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शर्मा को संबोधित त्यागपत्र वहां के चौकीदार को सौंप दिया। सांसद ने बाद में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विकास किया था विकास करेंगे। वे अंशुल थे और अंशुल ही रहेंगे। चौकीदार न कहेंगे। उनके ख्याल से यदि विकास ही मानक था तो विकास के लिए 24 हजार करोड़ रुपये लगाने और पार्टी को आखिरी से पहले पायदान पर लाने के बाद ये निर्णय क्यों। सदन में उनकी उपस्थिति 94 फीसदी व लोकसभा क्षेत्र में 95 फीसदी रही। तो फिर उनका दोष कहां पर था ?
सांसद ने कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी में कोई जिम्मेदार पदाधिकारी मिलने को तैयार नहीं है। अपना स्पष्टीकरण देने को तैयार नहीं है। उनका दोष था कि उन्होंने अपने समाज के लिए सिर उठाया। यदि ऐसा है तो ये कट तो सकता है झुक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि आज का सबसे जिम्मेदार चौकीदार ही है। इसलिए सोचा कि जो नामी चौकीदार हैं उनके बजाय असली चौकीदार को क्यों न दिया जाए। धन कुबेर चौकीदारों को इस्तीफा देने का कोई मायने नहीं था। उन्होंने कहा कि अब किस पार्टी में जा रहे हैं, इस बारे में अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। सियासी भविष्य को लेकर भी अभी कुछ नहीं कह सकते।

सपा में शामिल होने की अटकलें

पता चला है कि सांसद अंशुल सपा पार्टी कार्यालय में पहुंचे हैं। वहां राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात हो चुकी है। जल्द ही वे सपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। सपाई भी चुप्पी साधे हैं।