नोएडा में छह हजार बायर्स को 12 साल बाद मिली खुशखबरी

नोएडा
 यूनिटेक बिल्डर के 10 हाउसिंग प्रॉजेक्ट के बायर्स के लिए करीब 12 साल बाद अच्छी खबर है। नोएडा अथॉरिटी ने इन प्रॉजेक्ट के नक्शे पास कर दिए हैं। अब इन प्रॉजेक्ट में निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। अथॉरिटी ने यह नक्शे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पास किए हैं। पिछले 4-5 साल से नोएडा अथॉरिटी यह कहते हुए नक्शा पास नहीं कर रही थी कि अथॉरिटी का बकाया पैसा अभी नहीं मिला है। ऐसे में नक्शा पास नहीं किया जा सकता। यूनिटेक के प्रॉजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की तरफ बोर्ड तो नियुक्त हो चुका था, लेकिन नक्शा पास न होने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था। ऐसे में करीब 12 साल पहले बुकिंग कराने वाले बायर्स अब तक इंतजार कर रहे थे।

नोएडा अथॉरिटी ने वर्ष 2006-07 में नोएडा प्राधिकरण ने यूनिटेक को जमीन आवंटित करनी शुरू की थी। सेक्टर-96, 97, 98, 113 और 117 में अलग-अलग परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटित की। जमीन आवंटन होने के कुछ साल बाद बिल्डर ने अथॉरिटी को जमीन की कीमत देनी बंद कर दी। इससे बिल्डर पर बकाया बढ़ता गया। इस बीच यूनिटेक के चेयरमैन सहित अन्य लोग जेल चले गए। फिर सरकार की तरफ से फ्लैट बायर्स की समस्याओं को देखते हुए सरकार की तरफ से यूनिटेक के प्रॉजेक्ट को बोर्ड नियुक्त किया गया था। वहीं अथॉरिटी और बिल्डर ग्रुप को प्रकरण कोर्ट में पहुंच गया था। अब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने पर नोएडा अथॉरिटी ने नक्शा पास कर दिया है।

फ्लैट और प्लॉट की स्कीम

अथॉरिटी अधिकारियों ने बताया कि सेक्टर-96, 97, 98 में 2 ग्रुप हाउसिंग के अलावा विलोज 1 और 2 के नाम से प्लॉट स्कीम भी है। इन सेक्टर में मुख्य रूप से अंबर, बरगंडी आदि हैं। इनमें 897 फ्लैट और प्लॉट बुकिंग की जा चुकी थी। सेक्टर-113 में 1 ग्रुप हाउसिंग प्रॉजेक्ट हैं इनमें 1621 फ्लैट की बुकिंग बिल्डर की तरफ से की जा चुकी थी। सेक्टर-117 में 6 ग्रुप हाउसिंग प्रॉजेक्ट हैं जिनमें 3327 फ्लैट बनने हैं। अथॉरिटी अधिकारियों ने बताया कि यह वो प्रॉजेक्ट हैं जिनमें कुछ हिस्सा बन भी चुका है।

9 हजार करोड़ रुपये का है बकाया

नोएडा अथॉरिटी से मिली जानकारी के मुताबिक, यूनिटेक बिल्डर ग्रुप पर अथॉरिटी का कारीब 9 हजार करोड़ रुपये बकाया है। पहले मूल राशि कम ही थी लेकिन फिर समय पर बकाया जमा न होने पर ब्यात बढ़ता चला गया। अथॉरिटी ने तीन जगहों पर इस ग्रुप को 156 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन 2006-2007 में इस ग्रुप को आवंटित की थी। इसमें करीब 90 हेक्टेयर जमीन अभी शहर में अलग-अलग जगहों पर खाली पड़ी हुई है। अथॉरिटी ने बीच में यह तैयारी की थी कि खाली पड़ी जमीन का आवंटन निरस्त कर उसे वापस ले लिया जाए। कोर्ट में भी यह पक्ष रखा गया था। लेकिन अथॉरिटी के मुताबिक फैसला नहीं रहा। सूत्रों की माने तो कोर्ट ने इन 10 प्रॉजेक्ट में फंसे बायर्स की समस्या को देखते हुए अथॉरिटी से कहा है कि पहले नक्शा पास किए जाएं। बकाए को लेकर कोर्ट बाद में निर्णय लेगा।

Source : Agency

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Name: धीरज मिश्रा (संपादक)

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