नई दिल्ली । उद्योग जगत ने नई सरकार के गठन से पहले ही अर्थव्यवस्था में राहत देने की मांग की है। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) ने कहा है कि उद्योगों को उबारने के लिए नरेन्द्र मोदी सरकार को राहत देनी होगी। फिक्की ने कहा कि आने वाला बजट सरकार के लिए एक अवसर होगा जिससे वह उपयुक्त राजकोषीय राहत और नीतियों के साथ खपत और निवेश को बढ़ाएं। फिक्की ने यह भी कहा कि निर्यात आधारित उद्योगों को करों में रियायत देनी चाहिए। फिक्की ने कहा कि कृषि से संबंधित कारोबार में बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए पांच से सात साल के लिए टैक्स होलीडेज (कर से मुक्ति) दिया जाना चाहिए। उद्योग संगठन ने अधिकतम आयकर की दर लागू करने की सीमा भी बढ़ाने की मांग की है। 
(फिक्की) ने वर्ष 2019-20 के लिए आगामी बजट से पहले एक ज्ञापन में वित्त मंत्रालय से कहा है कि अर्थव्यवस्था के गंभीर मसलों पर अगर ध्यान नहीं दिया गया तो इसका नकारात्मक प्रभाव आगे देखने को मिलेगा। फिक्की ने कहा कि अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सरकार को तत्काल करों और ब्याज दरों में कटौती करनी होगी।
फिक्की ने कहा कि नई सरकार को खपत बढ़ाने के लिए कॉरपोरेट और व्यक्तिगत कर में कटौती करनी चाहिए और किसानों को 6 हजार रुपये देने की योजना को और प्रभावी तरीके से अपनाना चाहिये। 
फिक्की ने वित्त मंत्रालय को किसानों सीधे दी जार रही सरकारी सहायता डायरेक्ट इनकम सपोर्ट (डीआईएस) का दायरा बढ़ाने और इसमें वृद्धि करने का सुझाव भी दिया है। फिक्की ने कृषि क्षेत्र के संकट का समाधान करने का सुझाव देते हुए कहा कि अंतरिम बजट 2019-20 में किसानों के लिए लाई गई डीआईएस का विस्तार किया जाना जाहिए और इसके तहत छोटे व सीमांत किसानों को दी जाने वाली 6,000 रुपये सालान की रकम में वृद्धि की जानी चाहिए।
साथ ही उद्योग संगठन का सुझाव है कि कृषि क्षेत्र की मौजूदा सब्सिडी की भी समीक्षा की जानी चाहिए और इनमें से ज्यादातर को डीआईएस में शामिल किया जाना चाहिए।