रायपुर। राज्य में बीएड कॉलेजों पर मान्यता को लेकर तलवार लटक रही है। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) ने सात कॉलेजों की मान्यता खत्म करने की सिफारिश कर दी है। ऐसे में कॉलेज अब कोर्ट की शरण में हैं। नियमों के पेंच में उलझे कॉलेजों के कारण 14500 सीटों में से 1050 सीटें इस साल कम हो सकती हैं। बता दें कि एनसीटीई ने प्रदेश के सात बीएड कॉलेजों की मान्यता समाप्त करने की सिफारिश इस आधार पर कर दी है कि वहां नियमों के अनुसार प्राध्यापकों की भर्ती नहीं हुई है।

बता दें कि एनसीटीई के नये मापदंडों वाले साल 2016-17 के नियम अभी तक विवि ने ही लागू नहीं किये थे। प्रदेश के बीएड कॉलेज विश्वविद्यालयों में अधिनियम लागू होने के बाद ही नियमों का पालन करते हैं। लिहाजा कॉलेजों में इस नियम का पालन करने का सवाल ही नहीं उठता है।
इस आधार पर स्वामी श्री स्वरूपानंद महाविद्यालय और जगतगुरु शंकराचार्य महाविद्यालय को कोर्ट से स्टे भी मिल गया है। वहीं कल्याण महाविद्यालय, भिलाई मैत्री कॉलेज, शिवा बीएड कॉलेज दुर्ग, छत्तीसगढ़ कॉलेज भिलाई और श्रीराम कॉलेज राजनांदगांव भी कोर्ट की शरण में हैं।

उम्मीद है कि कोर्ट से इन कॉलेजों को फिलहाल राहत मिल सकती है, लेकिन अभी की स्थिति में नियमों के पेंच में ये कॉलेज फंसे तो प्रदेश में बीएड की सीटें कम हो जाएंगी। एससीईआरटी के अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल एनसीटीई ने इन कॉलेजों की मान्यता को लेकर इन्कार किया है, लेकिन जिस आधार पर कॉलेज कोर्ट में अपना तर्क रख रहे हैं उससे उन्हें राहत मिल सकती है।
शिक्षक बनने की चाहत रखने वाले युवाओं के लिए बीएड की पढ़ाई हालांकि प्रदेश में अब और आसान हो गई है। 12वीं कक्षा के बाद सीधे चार वर्षीय बीए-बीएड पाठ्यक्रम में इस साल तीन नये कॉलेजों में प्रवेश मिलेगा। यहां इन पाठ्यक्रमों के लिए सभी मूलभूत व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। चार वर्षीय बीए-बीएड कोर्स के लिए दुर्ग जिले में हंडा स्थित कॉलेज, सरगुजा विवि के अंतर्गत उमादेवी कॉलेज और दुर्ग की संस्था सांदीपनि एकेडमी कॉलेज शामिल है। यहां 200 सीटों पर दाखिला होगा।
द्विवर्षीय के साथ चार वर्षीय बीएड कॉलेज के लिए भी व्यापमं इस साल परीक्षा लेगा। चार वर्षीय बीएड कॉलेजों के पाठ्यक्रम की कुल 200 सीटों में प्रवेश के लिए अलग से प्रवेश परीक्षा होगी। चार वर्षीय बीएड कोर्स सबसे पहले एनसीटीई ने दुर्ग की संस्था सांदीपनि एकेडमी कॉलेज को चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीए-बीएड, बीएससी-बीएड पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति दी थी। जो विद्यार्थी 12वीं की परीक्षा गणित या जीव विज्ञान के साथ 50 प्रतिशत अंक पाकर उत्तीर्ण हुए हैं, वे बीएससी-बीएड पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकेंगे। अन्य विषय में 50 प्रतिशत अंक से लेकर उत्तीर्ण विद्यार्थी बीए बीएड में प्रवेश ले सकेंगे। प्राप्तांक में छूट राज्य सरकार के नियमों के अनुसार होगी।
- दो कॉलेजों को कोर्ट से स्टे मिल गया है। साल 2016-17 के नियमों के अनुसार सभी शिक्षकों की नियुक्ति नेट और पीएचडी के आधार पर होनी है, लेकिन रविवि ने इस नियम को लागू नहीं किया था इसलिए कॉलेजों ने नियुक्ति पहले के मापदंड के आधार पर की थी अभी दो कॉलेजों को स्टे मिल गया है। - राजीव गुप्ता, कोषाध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट कॉलेजेस ऑफ छत्तीसगढ़