भाकपा माले ने सोमवार को पूरे देश में 22 लोकसभा सीटों पर चुनाव लडऩे की घोषणा की है। माले ने बिहार में आरा के अलावा तीन और सीटों पर चुनाव लडऩे की घोषणा कर महागठबंधन के नेताओं की नींद उड़ा दी है।

माले ने सिवान से अमरनाथ यादव, जहानाबाद से कुंती देवी और काराकाट से राजाराम सिंह को उम्मीदवार बनाया है। माले के इस फैसले से महागठबंधन का ही खेल बिगड़ेगा क्योंकि तीनों सीटों पर माले का अच्छा-खासा प्रभाव है। जबकि राजद ने अपने कोटे से आरा सीट माले को दी है और उस पर माले ने राजू यादव को उम्मीदवार बनाया है। 

2014 के लोकसभा चुनाव में सिवान सीट पर अमरनाथ यादव माले के उम्मीदवार थे तब उन्हें करीब 82 हजार वोट मिले थे। सिवान में माले ने मो.शहाबुद्दीन के आतंक के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी है और उसके लोकप्रिय नेता चन्द्रशेखर ने कुर्बानी दी।

इस बार भी माले ने अमरनाथ यादव को इस सीट से उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में एनडीए की जदयू की प्रत्याशी कविता सिंह के लिए जीत की राह आसान नजर आ रही है क्योंकि महागठबंधन की ओर से राजद की हिना शहाब मैदान में है जो मो.शहाबुद्दीन की पत्नी हैं। ऐसे में महागठबंधन के वोटों का ही विभाजन तय है। यही स्थिति जहानाबाद और काराकाट सीट पर देखने को मिलेगी। 


भाजपा को हराना प्राथमिकता : दीपंकर

माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने पत्रकारों को बताया कि भाजपा को केन्द्र की सत्ता से बाहर करना हमारा लक्ष्य है और इसके लिए अभियान चलाएंगे। उन्होंने बताया कि झाारखंड के कोडरमा से राजकुमार यादव और पलामू से सुषमा मेहता को उम्मीदवार बनाया गया है।

 राजद व महागठबंधन के अन्य दलों ने आरा सीट पर राजू यादव को समर्थन दिया है। इसके बदले में पाटलिपुत्र सीट माले ने राजद के लिए छोड़ दी है। इस मौके पर पार्टी के राज्य सचिव कुणाल, पोलित ब्यूरो के सदस्य धीरेन्द्र झा, कविता कृष्णन, केडी यादव, अमर और गोपाल रविदास मौजूद थे।