सीएम योगी के चार साल: जीरो टालरेंस बनेगा भाजपा का हथियार

 लखनऊ  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चार साल पहले कार्यशैली के जिस मंत्र ‘जीरो टालरेंस’ के साथ काम शुरू किया था, वह अब भारतीय जनता पार्टी का सियासी समर में सूत्रवाक्य बनने जा रहा है। विधानसभा में विपक्ष को जवाब देने का मौका रहा हो या फिर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों का सिलसिला खुद मुख्यमंत्री इस मंत्र का मर्म और महत्ता समझाते रहे हैं। भाजपा ने अब तय किया है कि मिशन-2022 के रण में ‘जीरो टालरेंस’ की नीति को विपक्ष के भ्रष्टाचार और अराजकता के खिलाफ हथियार बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के शुक्रवार को चार साल पूरे हो गए। इस दौरान उनकी सरकार का मंत्र जीरो टालरेंस ही रहा। अपराधियों पर कार्रवाई हो या फिर लवजिहाद का मुद्दा, बूचड़खानों पर कार्रवाई हो या माफिया की संपत्ति जब्त करने का फैसला। प्रदेश सरकार ने जीरो टालरेंस को कामकाज की एक शैली के रूप में स्थापित किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह कहते हैं-‘कार्यसमिति में मिशन-2022 के एजेंडे पर चर्चा हुई और कार्यक्रम पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लेकर छोटे से छोटे कार्यकर्ताओं को दिए गए हैं। निःसंदेह जीरो टालरेंस की नीति पर चलते हुए चार साल का निष्पक्ष और भ्रष्टाचार रहित कार्यकाल हमारी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हथियार होगा। इसी बहाने भाजपा सियासी रण में विपक्ष को भ्रष्टाचार के मुद्दों पर घेरेगी। युवाओं को अहसास है कि कैसे सपा-बसपा सरकारों में सरकारी नौकरियां चहेतों को मोटी रकम लेकर बेची जाती थीं और अब पारदर्शिता से उन्हें नौकरी मिल रही है।’

वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक कहते हैं-‘ लोकतंत्र में सरकार का मुखिया किसी जाति-धर्म, पंथ की सीमाओं में खुद को नहीं बांध सकता। योगी सरकार ने इसी सिद्धांत को ‘जीरो टालरेंस’ या यूं कहें...'न काहू से दोस्ती न काहू से बैर' की शैली पर काम कर सिद्ध कर दिया है कि सरकार का मुखिया कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार हो तो सुशासन हर कीमत पर कायम किया जा सकता है।’

कहना गलत न होगा कि चाहे विपक्ष के मुद्दों पर हमले का मौका रहा हो या फिर भाजपा की कार्यसमिति में मुख्यमंत्री योगी ने भाजपा के कार्यकर्ताओं को ‘जीरो टालरेंस’ के महत्व को बखूबी समझाया। उन्होंने पुरजोर तरीके से बात रखते हुए पिछली सरकारों के उदाहरण दिए और कार्यकर्ताओं का समझाया कि अगर ‘जीरो टालरेंस’ न होता तो शायद आज विपक्ष के हाथ में सरकार के खिलाफ सियासी तौर पर दमदार मुद्दे हो सकते थे। लेकिन ‘जीरो टालरेंस’ की कार्यशैली का ही नतीजा है कि ऐसा कुछ नहीं है। 

भाजपा नेता नवीन श्रीवास्तव कहते हैं-‘अगर जीरो टालरेंस न होता तो राजस्व वसूली पिछली सपा-बसपा सरकार से हजारों करोड़ रुपये ज्यादा कैसे होती? कैसे खनन और आबकारी में हजारों करोड़ रुपये ज्यादा राजस्व मिला है, जबिक सरकार ने उपभोक्ताओं पर किसी अतिरिक्त कर का बोझ नहीं डाला। यह हर क्षेत्र में ‘जोरी टालरेंस’ के सिद्धांत से ही संभव हो सका।  
 

Source : Agency

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Name: धीरज मिश्रा (संपादक)

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