सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने से पहले लगातार दो बार लोकसभा के लिए चुनी गईं। उनके नाम देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का कीर्तिमान है वह भी आबादी में सबसे बड़े राज्य की। वे गरीबों और महिलाओं की काफी हमदर्द थीं। वे समस्याओं को टालने की बजाय तुरंत निपटाने पर जोर देती थीं।
तीन बार संसद में : सुचेता 1952 और 1957 में लगातार नई दिल्ली लोकसभा से चुनाव जीतकर संसद में पहुंचीं। पहला चुनाव उन्होंने किसान मजदूर प्रजा पार्टी से जीता था। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हो गईं। नेहरु मंत्रीमंडल में लघु उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री रहीं। वह 1967 में भी चुनाव जीती थीं। 
सुचेता का सफरनामा-
1908 में अंबाला में जन्मी सुचेता कृपलानी की शिक्षा लाहौर और दिल्ली में हुई।
1946 में वह संविधान सभा की सदस्य चुनी गई।
1952, 1957 और 1967 में लोकसभा का चुनाव जीता।
1958 से 1960 तक वह कांग्रेस की महासचिव रहीं।
1962 में मेंहदावल (संत कबीरनगर) से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित।
1963 से 1967 तक वह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं।
1974 में एक दिसंबर को उनका निधन हो गया।

स्वतंत्रता आंदोलन में : सुचेता ने अरुणा असफ अली और उषा मेहता के साथ भारत छोडो आन्दोलन में हिस्सा लिया था। सुचेता ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान लड़कियों को ड्रिल करना और लाठी चलाना सिखाया। सन 1942 में सारे बड़े नेताओं के जेल चले जाने पर उन्होंने अंडरग्राउंड रहकर आंदोलन का नेतृत्व किया। 

दिल से कोमल, शासन में कठोर : सुचेता दिल की कोमल तो थीं, लेकिन प्रशासनिक फैसले लेते समय वह दिल नहीं दिमाग की सुनती थीं। उनके यूपी के मुख्यमंत्रित्व काल में राज्य के कर्मचारियों ने लगातार 62 दिनों तक हड़ताल जारी रखी, लेकिन वह कर्मचारी नेताओं से सुलह को तभी तैयार हुई, जब उनके रुख में नरमी आई।

जेबी कृपलानी से विवाह : अंबाला में एक बंगाली परिवार में जन्मी सुचेता मजुमदार ने समाजवादी नेता और हैदराबाद (पाकिस्तान) में पैदा हुए जेबी कृपलानी से विवाह किया। सुचेता और जेबी कृपलानी दोनों ही काशी हिंदू विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर रहे।