नई दिल्ली । डॉक्टर्स का कहना है कि बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाओं के प्रयोग लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा ट्यूबरक्यूलोसिस और बॉडी बनाने वाले प्रोटीन सप्लिमेंट्स भी लिवर फेल होने की वजह बन सकते हैं। ऐसा उन पेशंट्स के साथ भी हो सकता है जिन्हें कभी लिवर की बीमारी न रही हो। डाक्टर्स की माने तो उनके पास हर हफ्ते एक या दो लिवर फेल होने के ऐसे केसेज आते हैं जो दवाओं की वजह से हुए हों। वह बताते हैं, इनके पीछे सबसे कॉमन वजह हर्बल दवाएं देखी जा रही हैं, इसके बाद नंबर आता है ऐंटी-टीबी दवाओं, बॉडी बिल्डिंग प्रोटीन सप्लिमेंट्स, पेनकिलर्स और ऐंटीबायॉटिक्स का। डॉक्टर्स की सलाह है कि लंबे वक्त तक किसी दवा के इस्तेमाल करने में सावधानी बरतनी चाहिए। डॉक्टर्स का कहना है, 'ज्यादातर दवाओं को कॉन्सनट्रेट करने और इनके मेटाबॉलिजम के लिए लिवर जिम्मेदार होता है इसलिए दवाओं से होने वाले नुकसान का पहला टारगेट लिवर होता है।' उन्होंने बताया कि जो मरीज ऐसी दवाएं ले रहे हों उन्हें लिवर का रूटीन चेकअप करवाते रहना चाहिए। जिनको फैटी लिवर, ऐल्कॉहॉल से होने वाली लिवर की बीमारी या हेपेटाइटिस बी या हेपेटाइटिस सी की वजह से लंबी बीमारी है, उन्हें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। रिसर्च बताती है कि दवाओं की वजह से उनका लिवर तेजी से डैमेज होता है। लिवर की समस्या के पीछे ऐल्कॉहॉल और हेपेटाइटिस ए, बी या ई के वायरस भी हो सकते हैं। लेकिन रिसर्च से सामने आया कि दवाओं से लिवर फेल होने वाली मौतों की संख्या 46.5 फीसदी है। डाक्टर्स बताते हैं कि कॉम्प्लिमेंट्री और अल्टरनेटिव दवाएं जिनमें हर्बल और डायट से जुड़े पदार्थ शामिल हैं, देश में तेजी से बढ़ रहे हैं। इन चीजों में ज्यादातर मल्टिपल इनग्रेडिएंट्स होते हैं जो कि लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं। 'अगर ड्रग से होने वाला नुकसान हल्का है तो इन दवाओं का प्रयोग बंद करने से लिवर फंक्शन ठीक हो सकता है। लेकिन अगर नुकसान ज्यादा है जिससे पीलिया, ब्लीडिंग डिसऑर्डर या पैरों और पेट में सूजन है तो यह सीरियस प्रॉब्लम है। ऐसे मरीजों को स्पेशलाइज्ड केयर की जरूरत होती है और कुछ केसेज में लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत भी पड़ सकती है।' आजकल ज्यादातर लोग साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए अल्टरनेटिव मेडिसिन और हर्बल दवाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि जरूरी नहीं कि इनसे आप हमेशा साइड इफेक्ट्स से बचे रहें।