घर में क्या कौन-सी दिशा में होना चाहिए, यह वास्तु शास्त्र में बताया जाता है। घर में सब चीजें ठीक होने और शुभ होने के लिए हमें वास्तु शास्त्र के अनुसार चलना जरूरी है। वास्तु ग्रंथों में एक आदर्श मकान में मेन गेट, बैडरूम, किचन, टॉयलेट या अन्य चीजें किस दिशा में हो उसका उल्लेख किया गया है। ऐसा होने से घर में वास्तु दोष नहीं लग पाता है और लोग आनंद पूर्वक अपने घर में खुशी से रहते हैं। भले ही किसी गांव में रह रहे हो या फिर शहर में, घर वो चीज है जहां इंसान अपनी सारी परेशानी होने के बाद भी एक सुकून महसूस करता है। हम कहीं से भी थके हारे होने पर जब घर आते हैं तो मन को बड़ा आराम मिलता है,घर चाहे जैसा भी हो। लेकिन ये घर तब और भी आराम देने वाला हो जाता है जब इसको बनाते समय सारी छोटी-छोटी चीजों का ख्याल रखा जाए। घर बनाना इतना भी आसान नहीं होता। इसके पीछे कई साल और कई सालों की मेहनत लग जाती है। जब घर बनाते ही है तो परिवार की खुशियों के लिए थोड़ा और सोच लें फिर और भी ज्यादा फायदेमंद हो जाता है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए वास्तु को जरूर ध्यान में रखें। जिससे घर पर मां लक्ष्मी की हमेशा कृपा बनी रहे और लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहे। साथ ही परिवार के लोग भी जीवन में तरक्की की सीढ़ियां चढ़ते रहे।घर बनाने में लाखों रूपए खर्च होते हैं, लेकिन थोड़ी-सी भी चूक इतने पैसे की महत्ता को खराब कर देती है। जिससे लोगों को कई बार काफी नुकसान भी उठाना पड़ जाता है। वास्तुशास्त्र में कई सारी चीजों का जिक्र किया गया है कि घर के कमरे, हॉल आदि किस दिशा में होनी चाहिए। इसी तरह से घर में रसोई घर की दिशा और टॉयलेट की दिशा का भी स्थान बताया गया है।

आइए जानते हैं कि किचेन और शौचालय किस दिशा में हो -

रसोई घर - रसोई घर में पकड़े वाला खाना ही हमें स्वस्थ और तनाव मुक्त रखता है। रसोई, घर में सबसे अहम हिस्सा होता है। अगर रसोई घर की दिशा गलत हो, तो इससे घर की महिलाओं पर सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। वास्तु के अनुसार, रसोई घर के लिए आग्नेय कोण यानि कि दक्षिण-पूर्व दिशा को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यदि घर में इस दिशा में रसोईघर नहीं है तो इसके चलते लगने वाले वास्तु दोष को दूर करने के लिए रसोईघर के उत्तर पूर्व में सिंदूरी गणेश जी की तस्वीर लगाएं। वास्तु के अनुरूप रसोईघर यदि सही दिशा में नहीं होता है तब ऐसे में रोग, शोक एवं धन की बर्बादी का सामना करना पड़ता है। पाचन संबंधी बीमारियां अन्न-धन की कमी, साथ ही महिलाओं की सेहत पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। वास्तु के अनुसार रसोई घर जहां हो, भोजन वहीं करना चाहिए। इसका जिक्र लाल किताब में भी किया गया है।

शौचालय - यह अपने आप में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका निर्माण गलत जगह होने से मुख्यत: पैसे और हेल्थ को लेकर समस्या सामने आती है। ऑफिस का टॉयलेट हो या घर का, उसका वास्तु के अनुसार होना बेहद आवश्यक है। पहले लोग शौचालय घर के बाहर बनाते थे, लेकिन बदलते समय में अब यह घर के अंदर ही बनाया जाता है। वास्तु शास्त्र को ध्यान में रखते हुए लोग अब काफी सारी चीजों का ध्यान रखते हैं। शौचालय की दिशा निर्धारित करने से समस्याएं कम आती है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक, शौचालय के लिए घर का दक्षिण-पश्चिम दिशा बेहतर होता है। इस दिशा में शौचालय का होना शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिशा में टॉयलेट के होने से मनुष्य अपनी जिंदगी से बेकार और दुखदायक चीजों का विसर्जन कर सकता है। शौचालय का निर्माण ख़राब ऊर्जा वाली स्थान पर होना चाहिए। यदि यह सही दिशा में नहीं होता है तो वैवाहिक जीवन में क्लेश हो सकता है। परिवार वालों के साथ मनमुटाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा नौकरियां व्यापार में नुकसान उठाना पड़ सकता है। साथ ही परिवार के लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। घर के मुखिया का आत्मविश्वास जगमगाते हुए भी देखा जाता है। एक बात का और ख्याल रखें कि बाथरूम और टॉयलेट अलग -अलग हो।