कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन के दौरान वीजा की मियाद खत्म होने के कारण सिंधी हिंदुओं के शरणार्थी समुदाय के 11 पुरुष पाकिस्तान में शादी के बाद अपनी पत्नियों के साथ पिछले छह महीने से पड़ोसी मुल्क में फंसे हैं। इंदौर लोकसभा क्षेत्र के भाजपा सांसद शंकर लालवानी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। लालवानी ने बताया, 'ये 11 पुरुष पाकिस्तान में शादी के बाद सिंध और बलूचिस्तान में अपनी पत्नियों के साथ फंसे हैं। वे मार्च में लागू लॉकडाउन के कारण तय समय पर भारत नहीं लौट सके और उनके नोरी (नो ऑब्जेक्शन टू रिटर्न टू इंडिया) वीजा की मियाद पूरी हो गई।'

गौरतलब है कि नोरी वीजा केंद्र सरकार द्वारा उन शरणार्थियों को जारी किया जाता है जिनके पास भारत की नागरिकता नहीं होती। लेकिन उन्हें लम्बी अवधि के वीजा (एलटीवी) के आधार पर देश में प्रवास की अनुमति मिली होती है। नोरी वीजा पाने वाले लोग पाकिस्तान की यात्रा के बाद 60 दिन के भीतर भारत लौट सकते हैं।

भाजपा सांसद ने बताया, 'चूंकि सभी 11 जोड़े भारत में अपनी गृहस्थी शुरू करना चाहते हैं। इसलिए मैंने उनके वीजा से जुड़ी प्रक्रिया जल्द पूरी करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से चर्चा की है। केंद्र सरकार ने इस विषय में सहानुभूतिपूर्वक विचार का भरोसा दिलाया है।' लालवानी ने कहा कि पाकिस्तान सरकार को भी उसके स्तर पर इन जोड़ों की रवानगी की औपचारिकताएं मानवता के नाते जल्द पूरी करनी चाहिये क्योंकि वे लम्बे समय से अपने भारत स्थित घर-परिवार से दूर हैं।

भाजपा सांसद ने बताया, 'शादी के वक्त पाकिस्तान की ज्यादातर वधुओं का भारत का विजिट वीजा स्वीकृत था। लेकिन लॉकडाउन के कारण वे भी तय समय पर भारत नहीं आ सकीं और उनके वीजा की मियाद पूरी हो गयी। अब इनमें से दो महिलाएं मां बनने वाली हैं।'

अपनी पत्नी के साथ पाकिस्तान में फंसे इंदौर निवासी सागर कुमार बजाज (26) ने एक वीडियो संदेश में बताया, 'मैं इंदौर से नोरी वीजा पर दो फरवरी को पाकिस्तान के जैकबाबाद पहुंचा था। मेरी जैकबाबाद में संध्या कुमारी के साथ 22 फरवरी को शादी हुई थी। (लॉकडाउन के कारण) मेरी पत्नी की भारत की वीजा अवधि जून में खत्म हो गई।'

उन्होंने कहा, 'हम बहुत परेशान हैं। मैं चाहता हूं कि मेरा और मेरी पत्नी का वीजा नये सिरे से जारी कर उसे मेरे साथ जल्द से जल्द भारत भेजा जाये।' पाकिस्तान में ब्याह रचाने के बाद अपनी पत्नियों के साथ वहीं फंस गये पुरुषों के शरणार्थी परिवार भारत के इंदौर, अहमदाबाद, नागपुर और पुणे में रहते हैं। ये परिवार पाकिस्तान से अपने बहू-बेटों की वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

इनमें सागर कुमार बजाज के पिता नानकराम (58) भी शामिल हैं। वह वर्ष 2013 में अपने परिवार के साथ पाकिस्तान से भारत आये थे और एलटीवी के आधार पर इंदौर में प्रवास कर रहे हैं। अपने बहू-बेटे को याद कर भावुक हुए 58 वर्षीय शरणार्थी ने कहा, 'मेरी बहू गर्भवती है। मैं अपने बहू-बेटे को जल्द से जल्द अपने घर में देखना चाहता हूं।'