5 अगस्त से सावन का माह शुरु हो चुका है। सावन के मह में जब चारों ओर हरियाली होती है तब हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। हरियाली तीज हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस साल यह तिथि 23 जुलाई 2020 को पड़ रही है। हरियाली तीज में सुहागन महिलाएं निर्जला व्रत रखते हैं और अपने हाथों में मेहंदी, नई चूड़ियां और पैरों में आलता लगाती हैं। इसके साथ ही महिलाएं नए वस्त्र पहनकर देवी पार्वती की पूजा अर्चना करती है।

ऐसे होती है हरियाली तीज की पूजा
हरियाली तीज के दिन सभी महिलाएं एकत्रित होकर किसी मंदिर में जाकर मां पार्वती की प्रतिमा को रेशमी वस्त्र और गहने से सजाती हैं। इसके बाद अर्ध गोले का आकार बनाकर माता की मूर्ति बीच में रखकर पूजा करती हैं और हरियाली तीज की कथा सुनती है। कथा समाप्त होने पर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं और सुहागनें अपने सास के पैर छू कर उन्हें सुहागी देती है।

हरियाली तीज की पौराणिक कथा
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता पार्वती सैकड़ों वर्षो की साधना के पश्चात भगवान शिव से मिली थी। हरियाली तीज की पौराणिक कथा के अनुसार 1 दिन भगवान शिव माता पार्वती को अपने मिलन की कथा सुनाते हैं और बताते हैं पार्वती तुमने मुझे अपने पति रूप में पाने के लिए तो 107 बार जन्म लिया, लेकिन मुझे पति के रूप में नहीं पा सकी तो तुमने 108वीं बार पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लिया और पर्वत पर मुझे पाने के लिए घोर तपस्या किया था।

भोलेनाथ ने बताया कि उस दौरान तुमने अन-जल त्याग कर, सूखे पत्ते का आहार ग्रहण करके दिन बिताए थे। शिव ने माता पार्वती से कहा कि तमाम अर्चने आए लेकिन तुम्हारे तप में बाधा नहीं पहुंची। उन्होंने बताया कि तुम एक गुफा के भीतर पूरी श्रद्धा और निष्ठा से मेरी आराधना में लगी थी। उन्होंने मां पार्वती से कहा कि उश दौरान तुमने सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को रेत से शिवलिंग का निर्माण कर मेरी आराधना की थी और उसी से प्रसन्न होकर मैंने तुम्हारी मनोकामना पूरी की।

भगवान शिव ने बताया कि तभी तुम्हारे पिताजी तुम्हें लेने पहुंचे और तुमने उनसे कहा कि पिताजी मैंने घोर तपस्या करके भोलेनाथ को प्रसन्न किया है, उन्होंने मेरी तपस्या से प्रसन्न होकर मुझे स्वीकार कर लिया है और मैं आपके साथ एक ही शर्त पर चलूंगी की आप मेरा विवाह भोलेनाथ के साथ ही करेंगे। भगवान शिव ने बताया कि इसके बाद पर्वतराज ने तुम्हारी इच्छा स्वीकार कर लिया और तुम्हें वापस घर ले गए और कुछ ही समय बाद उन्होंने पूरे विधि विधान के साथ हमारा विवाह किया।