श्रावण अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या है। हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास में आने वाली अमावस्या को श्रावणी अमावस्या कहा जाता है, इसे हरियाली अमावस्या भी कहते हैं।

प्रत्येक अमावस्या की तरह श्रावणी अमावस्या पर भी पितरों की शांति के लिए पिंडदान और दान-धर्म करने का महत्व है।

श्रावण अमावस्या मुहूर्त :

जुलाई 20, 2020 को 00:11:42 से अमावस्या आरंभ

जुलाई 20, 2020 को 23:04:10 पर अमावस्या समाप्त


इस साल श्रावण मास सोमवार से शुरू होकर सोमवार को ही खत्म हो रहा है। 3 अगस्त तक चलने वाले श्रावण मास में पांच सोमवार का विशिष्ट योग बन रहा है। इस सावन में खास बात यह भी है कि सावन की शुरुआत सोमवार से हुई तो सावन का समापन भी सोमवार के दिन ही होगा।

श्रावण मास में दो सोमवार को विशेष रूप से अमावस्या और पूर्णिमा पर आए हैं। श्रावण मास में सोमवती अमावस्या और सोमवती पूर्णिमा का संयोग 47 साल पहले बना था। श्रावण मास में पांच सोमवार 6 जुलाई प्रतिपदा, 13 जुलाई अष्टमी, 20 जुलाई अमावस्या, 27 जुलाई सप्तमी, 3 अगस्त पूर्णिमा पर विशेष योग बन रहे हैं।

सावन में सोमवती अमावस्या और सोमवार को पूर्णिमा का संयोग 47 साल बाद आया है। जबकि 20 साल बाद सावन सोमवार को सोमवती और हरियाली अमावस्या का संयोग बन रहा है। इससे पहले 31 जुलाई 2000 में सोमवती और हरियाली अमावस्या एक साथ थी।

इस साल हरियाली अमावस्या के दिन चंद्र, बुध, गुरु, शुक्र और शनि ग्रह अपनी-अपनी राशियों में रहेंगे। ग्रहों की इस स्थिति का शुभ प्रभाव कई राशियों पर देखने को मिलेगा। इसव्रत में महिलाओं द्वारा तुलसी की 108 परिक्रमाएं की जाती हैं।

सोमवार से शुरू और सोमवार पर समापन का संयोग अब 2024 में बनेगा


श्रावण मास का आरंभ सोमवार व समाप्ति सोमवार को होने का योग पूर्व में 1976, 1990, 1997 व 2017 में बना था। आगे अब 2024 में यह अद्भुत संयोग बनेगा।

सावन सोमवार को अमावस्या का संयोग 16 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 2004 में सावन महीने में पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास के रूप में मनाया गया था। उस साल दो बार सावन महीना पड़ा था। दूसरे सावन महीने में सोमवती अमावस्या का संयोग बना था।

हालांकि तब हरियाली अमावस्या सोमवार को नहीं थी। इसका संयोग 47 साल बाद आया है। जबकि 20 साल बाद सावन सोमवार को सोमवती और हरियाली अमावस्या का संयोग बन रहा है। इससे पहले 31 जुलाई 2000 में सोमवती और हरियाली अमावस्या एक साथ थी।

सावन हरियाली और उत्साह का महीना माना जाता है। इसलिए इस महीने की अमावस्या पर प्रकृति के करीब आने के लिए पौधरोपण किया जाता है। इस दिन पौधारोपण से ग्रह दोष शांत होते हैं। अमावस्या तिथि का संबंध पितरों से भी माना जाता है। पितरों में प्रधान अर्यमा को माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि वह स्वयं पितरों में प्रधान अर्यमा हैं।

हरियाली अमावस्या के दिन पौधरोपण से पितर भी तृप्त होते हैं, यानी इस दिन पौधे लगाने से प्रकृति और पुरुष दोनों ही संतुष्ट होकर मनुष्य को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। यह भारतीयों का पर्यावरण को समर्पित दिवस माना जा सकता है...इसलिए इस दिन एक पौधा लगाना शुभ माना जाता है।

श्रावण माह के शेष बचे दिनों में आने वाले ये हैं विशेष पर्व : 16 जुलाई कामदा एकादशी 20 जुलाई सोमवती हरियाली अमावस्या 23 जुलाई हरियाली तीज 25 जुलाई नागपंचमी 30 जुलाई पवित्रा एकादशी 3 अगस्त सोमवती पूर्णिमा, रक्षाबंधन, श्रावणी उपाकर्म।