भगवान की कई कथा हैं जिन्हे आप जानते होंगे लेकिन कई ऐसी भी कथा है जिनके बारे में आपने कभी नहीं सुना होगा. ऐसी ही एक कथा है माता पार्वती के गुस्से की. जी दरअसल एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती भगवान शिव से नाराज हो गई थीं. मगर भगवान शिव और पार्वती के बीच ऐसा झगड़ा हुआ कि पूरे संसार ने तबाही का मंजर देखा. सिर्फ यही नहीं सभी देवताओं को इसे रोकने के लिए ताकत लगानी पड़ी थी. कहा जाता है माता पार्वती एक बार मंडप में मातृकाओं के साथ बैठी हुई थीं. उनका रंग सभी के बीच थोड़ा दबा हुआ सा दिख रहा था.

तभी भगवान शंकर ने कहा- हे महाकाली, तुम मेरे पास आकर बैठो. मेरे गोरे शरीर के पास बैठने से तुम्हारी शोभा बिजली की तरह हो जाएगी. भगवान शिव ने आगे कहा कि तुम यदि रात्रि के समान काली मेरे पास बैठोगी तो मुझे नजर नहीं लगेगी. इस बात पर माता पार्वती क्रोधित हो गईं. उसके बाद माता पार्वती ने कहा- आपने जब नारद जी को मेरे पिता के पास मुझसे विवाह का प्रस्ताव भेजा था तब क्या आपने मेरा रूप-रंग नहीं देखा था. इस बात पर भोले भंडारी भी भड़क उठे. दोनों में भंयकर झगड़ा होने लगा. दोनों की लड़ाई और विवाद इतना बढ़ने लगा की तीनों लोकों में प्राकृतिक आपदाएं आने लगीं. तूफान, बारिश के साथ कलह मच गया. पंचतत्व, अग्नि, वायु, आकाश और पूरी पृथ्वी असंतुलित हो गई. वहीं जब सभी देवताओं ने ये देखा तो वो भी भयभीत हो उठे. उन्होंने प्रार्थनाएं करनी शुरू कर दी.

तभी पृथ्वी से एक दिव्य लिंग प्रकट हुआ. जिसमें से निकली वाणी ने कहा कि इस लिंग की पूजा करें. इसी से शिव-पार्वती के बीच का क्लेश दूर होगा. सभी देवताओं ने इस लिंग का पूजन किया. जिसके बाद माता पार्वती का गुस्सा शांत हुआ. आप सभी को बता दें कि इस शिवलिंग को आज भी कलकेश्वर महादेव के रूप में पूजन के लिए रखा गया है.