नई दिल्ली. चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर अभी भी असमंजस बरकरार है. इस बीच उत्तराखंड के पूर्व सीएम और CWC सदस्य हरीश रावत (Harish Rawat) ने कहा है कि एक ‘कार्यकर्ता’ के तौर पर प्रशांत का स्वागत है लेकिन वह इस बात पर जोर नहीं दे सकते कि उनके शामिल होने के बाद संगठन उनके बताए ढर्रे पर ही चले. रावत ने कहा- कोई कितना भी काबिल क्यों ना हो, किसी के लिए पार्टी ‘गिरवी’ नहीं रखी जा सकती. रावत ने तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के संदर्भ में कहा कि वह किसी भी तरह से विपक्ष की एकता की मदद नहीं कर रही हैं.
किशोर के बारे में पूछे जाने पर, रावत ने कहा ‘कोई भी भारतीय नागरिक और जिसे स्वतंत्रता आंदोलन और कांग्रेस के मूल्यों में विश्वास है वह पार्टी का सदस्य बन सकता है. हम हमेशा नए विचारों का स्वागत करते हैं लेकिन पार्टी किसी खास व्यक्ति के लिए गिरवी नहीं रखी जा सकती… वह बहुत काबिल हो सकते हैं लेकिन हम यह नहीं कह सकते, बाबा, अब आप हमारी ओर से काम करें, हम काम करना बंद कर रहे हैं.’

कांग्रेस के पास काम करने का लोकतांत्रिक तरीका- रावत
रावत ने कहा- ‘कांग्रेस के पास काम करने का बहुत ही लोकतांत्रिक तरीका है… हर किसी की भूमिका है. अगर प्रशांत किशोर को लगता है कि वह कांग्रेस के माध्यम से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, तो उनका हमेशा स्वागत है. लेकिन हमारा स्पष्ट मानना है कि उन्हें पार्टी के संविधान और परंपरा का पालन करना होगा.’पश्चिम बंगाल के बाहर विस्तार करने की तृणमूल की कोशिश और असम में सुष्मिता देव और गोवा में लुइज़िन्हो फेलेरियो जैसे कांग्रेस नेताओं को पार्टी में शामिल करने पर, रावत ने कहा कि यह ‘उत्सुकता’ ‘भाजपा के विरोध में लोकतांत्रिक ताकतों को कमजोर कर रही है.’
 CM ममता बनर्जी  पर रावत ने कहा, ‘हम युवा कांग्रेस और संसद में लंबे समय तक साथ रहे… जिस तरह से उन्होंने (पश्चिम बंगाल) चुनावों में (नरेंद्र) मोदी और अमित शाह को टक्कर दी, मैं उसका सम्मान करता हूं (लेकिन) उन्हें यह समझना चाहिए कि जिन राज्यों में उनकी पार्टी की कोई मौजूदगी नहीं है, वहां उन्हें चुनाव के समय कांग्रेस के लोगों को ना तो पार्टी में शामिल करें और ना ही कोई पद दें. ऐसा करके आप गोवा और पूर्वोत्तर में कांग्रेस को कमजोर कर रहे हैं. मेरा निजी तौर पर मानना है कि इससे विपक्ष की एकता को कोई मदद नहीं मिल रही है.