भटकती गौ माताओं को अब मिलेगा आसरा 
 

गऊ अभण्यारण में गऊ विचरण प्रारम्भ 

टिमरनी- वर्तमान परिस्थितियों में गौवंश को बचाने तथा उनका संरक्षण संवर्धन करने के लिए स्थाई एवं स्वावलंबी व्यवस्था हेतु एकमात्र विकल्प है गो अभ्यारण जिसमें गोवंश को जल पीने तथा स्वतंत्रता पूर्वक विचरण कर चरने की व्यवस्था करने की आवश्यकता है। दिनांक 23 सितंबर 2020 को गौ अभ्यारण की नीव का दीप प्रज्वलित करने हेतु उसकल्ली कपासी फुटान नेशनल हाइवे ५९ ए के बगल में भूमि पर गौ संरक्षण एवं संवर्धन की संकल्पना को आकार देने हेतु आभामण्डल से आवाज आई कि वन संरक्षण जल संरक्षण नक्षत्र वाटिका बोरी बंधान नाडेप बनाकर प्राकृतिक झरना को मोटर पंप से जीवित रखना गऊ माता पूर्ण रूप से हर रोज चरवाहों के माध्यम से वन में विचरण करने स्वतंत्र व बंधनमुक्त रहे जिसमें आप सभी अपने आसपास भटकती हुई गऊ माता को गौ अभण्यारण तक पहुंचाने का अवसर न जाने दें, जिससे गौ माता स्वस्थ एवं प्रसन्न रह सके।
इस दौरान कई लोगों ने गौ माताओं को लाकर यहां छोड़ा जिनका गौ पूजन आरती व भूमि पूजन भी की गई। सभीजनों का उत्साह देखने लायक था। सभी उपस्थित जनों का कहना पड़ा कि आज गऊ माता पर हो रहे अत्याचार को देखा नहीं जा रहा है। गऊ के श्रृाप से आज मानव पर विपत्तीयां आ रही हैं। परंतु अब मां नर्मदा की कृपा से गौ अभ्यारण की संरचना आप सब की भावना को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से ही होगी। सब के संकल्प व सहयोग से यहां चारों धाम गौमुख धाम भादूगांव शिवशक्ति धाम कपासी आला ओखली धाम गंजाल व इन्द्रासन देवी दरबार उसकल्ली के बीच मध्य में स्थित गौ अभण्यारण धाम के नाम से प्रसिद्ध होगा। गौमाता को आदर्श मानते हुए सभी के सपनों को साकार करने की बात रखी। सभी का उद्देश्य सिर्फ गऊ का स्वास्थ्य सर्वोपरि और वह प्रसन्न रहे यही संकल्पना के मिशन को लेकर काम करने का है। बैठक में क्षेत्र के 500 गौ भक्तों ने भाग लेकर गऊ गुठान की साफ सफाई भी की। प्रथम दिवस स्थानीय ४१ गौवंश व नगर परिषद टिमरनी से १० गौवंश की आमत रही।