रायपुर : छत्तीसगढ़ के वनक्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों के बसे गांव सौर उर्जा से जगमगाने लगे हैं। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देशन में छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण क्रेडा द्वारा राज्य के ऐसे इलाके जहां पर विद्युत लाइन पहुंचाने में दिक्कत आ रही है वहां सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली पहंुचाने का कार्य किया जा रहा है। सौर उर्जा से इन क्षेत्रों के लोगों के जीवन में तरक्की की नई राह खुल रही है। सौर उर्जा से इन इलाकों में किसानों को सिंचाई सुविधा मिल रही है। वहीं स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा हुआ है।

कबीरधाम जिले में बोड़ला एवं पंडरिया विकासखण्डो सहित अन्य बैगा बाहुल गांवों में कार्य योजना के तहत वहां सौर ऊर्जा के पावर प्लांट लगाए जा रहे हैं। योजना के तहत क्षेत्र में 51 सोलर पावर प्लांट के माध्यम से 47 स्थलों पर विद्युतीकरण का कार्य किया गया है। यहां करीब 600 यूनिट बिजली का प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है, जिससे यहां के जंगलों एवं दुर्गम पहाड़ियों में स्थित उप स्वास्थ्य एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रां में बिजली की आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा वहां निवासरत बैगा आदिवासी परिवारों को सोलर होम लाइट प्रदान कर उनके घरों को रौशन करने कार्य क्रेड़ा द्वारा किया गया है।
    जिला चिकित्सालय में भी बिजली बचाने के उद्देश्य से 50 किलो वाट क्षमता के आन ग्रिड सोलर पावर प्लांट संयंत्र के स्थापना का कार्य क्रेडा द्वारा कराया गया है। इस प्लांट संयंत्र से प्रति दिन लगभग 150 से 200 यूनिट बिजली सौर ऊर्जा से उत्पादन किया जा रहा हैं। जिसे सीधे  विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रदायित विद्युत  सप्लाई से सिंक्रोनाइज कर प्रति दिन जिला अस्पताल में विद्युत खपत को कम किये जाने का कार्य किया जा रहा है। ऑन ग्रिड संयंत्र स्थापना से लेकर अब तक सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापना से स्वास्थ्य केंद्रो को विद्युत व्यवस्था के साथ साथ वित्तीय लाभ भी हो रहा  है।
    क्रेडा विभाग द्वारा सोलर पावर प्लांट स्थापना के साथ ही 5 वर्षों की वारंटी भी रहती हैं, जिसके अन्तर्गत 5 वर्ष तक मेंटेनेन्स कार्य में होने वाले व्यय का वहन विभाग द्वारा किया जाता हैं। स्वास्थ्य केंद्रो में स्थापित सभी सौर ऊर्जा संयंत्र वर्तमान में कार्यशील अवस्था हैं । विगत वर्ष 2019-20 में क्रेडा द्वारा वारंटी अवधि समाप्त हो चुके 17 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रो एवं 3 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रो में स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्रों के बैटरी बैंक विभागीय मद से बदल कर नई स्थापित कराई गई हैं, और 3 स्थलों के बैटरी बदले के लिए प्रस्ताव संबधित कार्यालय को भेजी जा चुकी हैं । ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित शासकीय अस्पतालो में जहां परंपरागत विद्युत बार-बार बाधित होती रहती हैं वहां सौर ऊर्जा अत्यंत ही उपयोगी साबित हो रही है।