दिल्ली-वाराणसी के बीच वाया कानपुर चलने वाली ‘वंदे भारत’ एक्सप्रेस को समय से चलाने के चक्कर में रोज कई ट्रेनें फंसती हैं। गाजियाबाद से प्रयागराज के बीच अप-डाउन में कम से कम 28-30 ट्रेनों का परिचालन इससे प्रभावित होता है। इनमें 16 मालगाड़ियों के साथ ही 12 मेमू, इंटरसिटी और एक्सप्रेस ट्रेनें हैं। पिछले दिनों मवेशी टकराने, पत्थरबाजी और अन्य वजहों से वाराणसी से वापसी में वीआईपी ट्रेन कहीं न कहीं लेट रही। देश की सबसे तेज गति से चलने वाली ट्रेन की लेटलतीफी की समीक्षा रेलवे बोर्ड में हुई तो इसको पटरी पर लाने का जिम्मा उत्तर मध्य रेलवे, पूर्वोत्तर रेलवे और उत्तर रेलवे के परिचालन विभाग को सौंपा गया। इसके बाद ओवरलोड हावड़ा-दिल्ली रूट पर परिचालन स्टॉफ (क्रू कंट्रोलर) ने इस ट्रेन के गुजरने के दस मिनट आगे-पीछे मेल, एक्सप्रेस, मेमू और मालगाड़ियों को पहले ही लूप लाइन या आउटर पर रोकने का फैसला लिया। इसके कारण ट्रेनें फंसती हैं, जिसका सीधा असर लगभग 20 हजार यात्रियों पर पड़ता है। 

कई दिन तक फंसी रहतीं मालगाड़ियां

रेलवे परिचालन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि ‘वंदे भारत’ एक्सप्रेस को अकारण कहीं रोका नहीं जा सकता है। इस कारण दूसरी ट्रेनों को लूप या सिक लाइन पर रोकते हैं। कई बार मालगाड़ी रोकी जाती है तो उसे निकलने का मौका ही नहीं मिलता और कई दिनों तक फंसी रहती है। फिर इन मालगाड़ियों को सोमवार या गुरुवार को चलवाया जाता है, क्योंकि ये दो दिन वंदे भारत एक्सप्रेस नहीं चलती है। 

कानपुर की ये गाड़ियां होतीं प्रभावित

-इलाहाबाद इंटरसिटी, मगध, संगम व गुवाहाटी-आनंद विहार होतीं प्रभावित
-कानपुर सेंट्रल से पास होने वाली छह मालगाड़ियां भी रोज रोक दी जाती हैं
-अलीगढ़, खुर्जा, हाथरस से जाने-आने वाली हर मेमू प्रतिदिन रोकी जाती
-इन स्टेशनों से छह मेमू से 8 हजार से अधिक एमएसटी होल्डर करते यात्रा