बीजिंग | कोरोना वायरस को लेकर बिगड़े रिश्ते की वजह से अमेरिका ड्रैगन को एक के बाद एक टेंशन दे रहा है। अब ट्रंप सरकार चीन को यूएस डॉलर सिस्टम (SWIFT) से बाहर निकाल सकती है या उसके एक्सेस में कटौती कर सकती है। चीनी अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक अमेरिका के इस संभावित कदम को लेकर बीजिंग टेंशन में है।

सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनैंशल टेलिकॉम्युनिकेशन (SWIFT) एक नेटवर्क है जिसका इस्तेमाल दुनियाभर के बैंक वित्तीय लेनदेन की जानकारी देने और प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह उन इन्फ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा है जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश में अमेरिकी डॉलर की भूमिका अहम है। 

वैश्विक रूप से बैंकों के अमेरिकी बैंकों से संवाद संबंध हैं, जिसके जरिए वे अमेरिकी डॉलर ट्रांसजेक्शन करते हैं। इस पेमेंट सिस्टम के जरिए वॉइट हाउस अमेरिकी बैंकों को किसी व्यक्ति, संस्था या देशों से लेनदेन रोकने का आदेश दे सकता है। शिनजियांग और हांगकांग को लेकर दुनियाभर में घिर चुके चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी इन दिनों टेंशन में है। 

हालांकि, सीसीपी के कुछ समर्थक यह भी मानते हैं कि अमेरिका चीन के खिलाफ उस तरह के कठोर कदम नहीं उठाएगा जैसे उसने ईरान और नॉर्थ कोरिया के खिलाफ उठाए, क्योंकि इससे अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बढ़ जाएगा। कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि चीन का डर वास्तविक है, क्योंकि यदि संबंध यूं ही बिगड़ते रहे तो अमेरिका बीजिंग पर हमले के लिए डॉलर आधिपत्य का इस्तेमाल कर सकता है। 

चीन में यह डर ऐसे समय में फैला है जब हाल ही में अमेरिका ने उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार और हांगकांग की स्वतंत्रता पर प्रहार करने की वजह से चीनी अधिकारियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। हाल ही में अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ ने हुआवेई सहित कुछ टेक्नॉलजी कंपनियों के कुछ अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।