लखनऊ । प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि अखिलेश यादव ने कहा कि यूपी सरकार दिल्ली वाली (केंद्र सरकार) सरकार की नकल करती है। किसान बिल राज्यसभा में संख्या न होने के बावजूद पास किया गया। वही, नकल यूपी सरकार ने विधान परिषद में किया। बहुमत को दबा कर बिल पास करवा रही है। सभी एमएलसी धरने पर थे, लेकिन किसी की परवाह नहीं की है। ये सरकार जनता का अपमान कर रही है। सदन के बहुमत का अपमान कर रही है।
बुधवार को यहां आयोजित पत्रकार वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री ने बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम मोटेरा का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर किए जाने पर चुटकी ली। कहा कि इसीलिए हमने लखनऊ के स्टेडियम (इकाना) का नाम भगवान विष्णु के नाम पर रखा था। क्योंकि भगवान के आगे किसी नेता का नाम नहीं हो सकता है। हम तो यूपी सरकार से कहेंगे कि हट जाइए, नौ महीने में एक और स्टेडियम बना देंगे। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार का सबसे बड़ा अचीवमेंट है कि इनकी दोबारा सरकार नहीं आएगी। अब तो सीएम लाल टोपी वालों से डरने लगे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सरकार बड़े संस्थान बेच रही है तो यूपी सरकार छोटे-छोटे संस्थान बेचने का काम कर रही है। संकल्प पत्र की एक भी बात पूरा नहीं की गई। ये सरकार दूसरे के किए कामों को अपना बताने में जुटी है। इनवेस्टमेंट कितना आया सरकार बताए?
सपा मुखिया ने कहा कि सदन में सीएम की भाषा देखिए। पटक कर मारने की बात कर रहे हैं। यह शोभा नहीं देता एक सीएम को। सरकार बताए कि सपा सरकार में जो प्लांट लग रहे थे? कितने पूरे किए। क्या वजह है कि सीएम के मुंह से ठोकना, पटक कर मारने की बात आती है। थर्मल प्लांट एक्सप्रेस वे बनाए जाने की बात जुबान पर नहीं आती है। उन्होंने कहा कि सरकार बताए कि कोविड काल में कितने मजदूरों की जान गई है। सदन में सरकार ने दुःख तक नहीं जताया। सपा ने मृतक परिवारों को एक-एक लाख की मदद की है। सरकार को बसों की चेचिस नंबर याद है, लेकिन मजदूरों का दर्द याद नहीं हैं। फर्जी एनकाउंटर किए जा रहे हैं, बीजेपी डरा कर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुना करने के लिए सीएम लंबी-लंबी बात कर रहे हैं। लेकिन किसानों को एमएसपी नहीं मिली। गन्ने का भुगतान नहीं किया जा रहा है। मेडिकल कालेजों का बजट कम कर दिया गया। जब पैसा नहीं होगा तो बनेंगे कैसे? वेंटिलेटर डिब्बों में बंद हैं। सीएम को पता नही है। मिड-डे-मील का पता नहीं। ये विदाई बजट था। अब सरकार का खेल खत्म है। अंतिम बजट से महिलाओं-युवाओं व आम वर्ग सबको सरकार ने धोखा दिया है।