कोलकाता । उम्पुन तूफान की वजह से पश्चिम बंगाल और ओडिशा में तबाही हुई है। पश्चिम बंगाल में इसकी वजह से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई । तूफान की वजह से 5 हजार से ज्यादा घर टूटे हैं। तूफान की रफ्तार 155 से 165 किलोमीटर प्रति घंटा थी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया है कि इस तूफान से सैंकड़ों करोड़ का नुकासान हुआ है। उन्होंने इसे कोरोना से ज्यादा बड़ा संकट बताया है। ममता बनर्जी ने कहा कि इलाके के इलाके तबाह हो गये। मैंने आज युद्ध जैसे हालात का सामना किया। कम से कम 10–12 लोग मारे गये हैं। नंदीग्राम और रामनगर, उत्तर तथा दक्षिण 24 परगना के दो जिले पूरी तरह तबाह हो गये। वहीं, ममता ने यह भी कहा कि इलाके के इलाके तबाह हो गये। मैंने आज युद्ध जैसे हालात का सामना किया। कम से कम 10–12 लोग मारे गये हैं। नंदीग्राम और रामनगर, उत्तर तथा दक्षिण 24 परगना के दो जिले पूरी तरह तबाह हो गये।

पश्चिम बंगाल के दीघा के पास जैसे ही तूफान उम्पुन की लैंडिंग हुई, उसके कुछ देर बाद इसका असर 168 किलोमीटर दूर हावड़ा में दिखा । यहां तूफान की वजह से हवा की रफ्तार 170 किलोमीटर तक पहुंचे गई। हावड़ा ब्रिज के अलावा शहर के दूसरे हिस्सों में भी तूफान की वजह से हिल गए। तूफान के बाद सड़क पर गिरे पेड़ों को हटाने के लिए NDRF और SDRF की टीमों को लगाया गया। राहत और बचाव के काम में लगी टीमों ने ना सिर्फ सड़क पर गिरे पेड़ों को हटाया बल्कि सड़क गर गिरे बिजली के खंभों से लटकी तारों को भी काटा।

कई जगहों पर पेड़ और दीवारें गिर गई हैं। इतना ही नहीं इलेक्ट्रिक पोल भी कई जगहों पर तूफान के कारण उखड़ गए हैं। बताया जा रहा है कि जिस वक्त ये तूफान कोस्टल इलाकों में आया, उस वक्त हवा की स्पीड 190 किलोमीटर प्रति घंटा थी। अम्फान तूफान का असर आज भी दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में जोरदार बारिश के साथ‑साथ तेज हवाएं चल रही हैं।

चक्रवात अपराह्न में करीब ढाई बजे पश्चिम बंगाल में दीघा और बांग्लादेश में हटिया द्वीप के बीच तट पर पहुंचा। चक्रवात के कारण तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही हुयी। चक्रवात की वजह से बड़ी संख्या में पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए वहीं कच्चे मकानों को भी खासा नुकसान हुआ। अब इसके कारण से असम और मेघालय में भी बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। पश्चिम बंगाल में नदिया और मुर्शिदाबाद पार करने के बाद देर रात तक चक्रवाती तूफान कमजोर होता दिखा है।

अधिकारियों के अनुसार चक्रवात आने से पहले पश्चिम बंगाल और ओडिशा में कम से कम 6.58 लाख लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के महानिदेशक एस एन प्रधान ने नयी दिल्ली में कहा कि ओडिशा में 20 टीमों को तैनात किया गया था, जबकि पश्चिम बंगाल में 19 यूनिट को तैनात हैं। उन्होंने कहा कि ओडिशा में एनडीआरएफ की टीमों ने सड़कों को साफ करने का अभियान शुरू कर दिया है। पश्चिम बंगाल में करीब पांच लाख लोगों को और ओडिशा में करीब 1.58 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

दूसरी ओर भारी बारिश के कारण कोलकाता के निचले इलाकों में सड़कों और घरों में पानी जमा हो गया। मध्य कोलकाता के अलीपुर में सुबह आठ बजे से रात 8.30 बजे के बीच 222 मिलीमीटर बारिश हुई तो दमदम में 194 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी। कोलकाता के अधिकतर हिस्सों में रात नौ बजे के बाद बारिश रुक गयी लेकिन तेज हवाएं चलती रहीं।

चक्रवात के कारण ओडिशा के पुरी, खुर्दा, जगतसिंहपुर, कटक, केंद्रपाड़ा, जाजपुर, गंजम, भद्रक और बालासोर जिलों के कई इलाकों में तेज बारिश हुयी। महापात्र ने कहा कि चक्रवात बुधवार देर रात तक ओडिशा से आगे बढ़ गया लेकिन उस समय तक खड़ी फ़सलों, पेड़ों और बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर नुकसान देकर गया ।