वाशिंगटन। अमेरिका के दो प्रतिष्ठित सांसदों ने हाल में भारत और अमेरिका के बीच संपन्न हुई टू प्लस टू मंत्री स्तरीय वार्ता के परिणामों का स्वागत करते हुए कहा कि यह बातचीत दोनों देशों के बीच ‘अभूतपूर्व सहयोग’ लेकर आई है। दिल्ली में भारत-अमेरिका के बीच संपन्न हुई टू प्लस टू वार्ता में दोनों देशों ने अपने सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने का संकल्प लिया और कुल पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किए जिनमें बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (बीईसीए) प्रमुख है। इस करार के तहत अत्याधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी, उपग्रह के गोपनीय डाटा और दोनों देशों की सेनाओं के बीच अहम सूचना साझा करने की अनुमति होगी। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा, पृथ्वी विज्ञान और आयुर्वेद के क्षेत्रों में सहयोग के लिए भी समझौते हुए। इस पर टू प्लस टू वार्ता के तीसरे संस्करण में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा अमेरिका की तरफ से वहां के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने हिस्सा लिया।
  कांग्रेस के सदस्य एवं सदन की विदेश मामलों की समिति में रिपब्लिकन नेता माइकल टी मैककॉल ने कहा, अमेरिका-भारत के बीच हुई टू प्लस टू मंत्री स्तरीय वार्ता हमारे व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर लेकर गई है। उन्होंने कहा कि बीईसीए भू-स्थानिक सहयोग समझौता समेत टू प्लस टू की उपलब्धियां एक कामयाब महीने में शुमार हुई हैं, जिसमें दोनों देशों ने जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड रूपरेखा को गहरा किया है और चार पक्षीय समुद्री अभ्यास मालाबार में ऑस्ट्रेलिया का स्वागत किया है। उल्लेखनीय है कि चीन के साथ सीमा विवाद के बीच भारत ने एक अहम कदम उठाते हुए, अमेरिका और जापान के साथ आगामी मालाबार अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया के भाग लेने की 19 अक्टूबर को घोषणा की थी। इस प्रकार यह क्वाड के चार देशों के बीच पहला सैन्य-स्तर का अभ्यास बन गया है। मैककॉल ने कहा कि अमेरिका, हिंद- प्रशांत की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए भारत के साथ काम करना जारी रखेगा और बाहरी आक्रामकता से भारत की संप्रभुता की रक्षा करने में उसके साथ रहेगा। हिंद-प्रशांत में चीन द्वारा अपने सैन्य प्रभाव को बढ़ाने की पृष्ठभूमि में भारत, अमेरिका और दुनिया की अन्य शक्तियां क्षेत्र की स्वतंत्रता तय करने के लिए बातचीत कर रही हैं। क्वाड समूह के विदेश मंत्रियों ने गठबंधन के तहत सहयोग को और बढ़ाने के लिए छह अक्टूबर को वार्ता की थी।