झांकियां निकालने की मांग 
 

इन्दौर । चलित झांकी के प्रथम निर्माता मिश्रीलाल वर्मा, रूपचंद पंजाबी, बाबूराव मलमकर, सीताराम कुशवाह, खुशीलाल ओझा आदि ने सन् 1924 से चलित झांकी का श्रीगणेश किया था, जिसमें हुकमचंद मिल के मैनेजर पंथ वेद साहब ने प्रथम झांकी बेलगाड़ी (रंगाड़े) पर भगवान गणपतिजी को विराजमान कर किशनपुरा पुल से कान्ह नदी में विसर्जन किया गया था।
ये परम्परा पिछले 96 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। श्री गणेश विसर्जन चल समारोह की यह परम्परा आगे भी कायम रहे। इन्दौर मालवा की शान, पूरे भारत वर्ष में सुप्रसिद्ध है। नेताजी सुभाष मंच के अध्यक्ष, समाजसेवी मदन परमालिया ने इन्दौर जिलाधीश, सांसद के साथ-साथ विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के जन प्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि मालवा की पहचान, मिल मजदूरों के खून-पसीने से सिंची हुई झांकियों की परम्परा कहीं लुप्त न हो जाए। इसके लिए कोरोना जैसी बीमारी से ना डरकर 96 वर्षों की परम्परा को कायम रखा जाना चाहिए। मालवा की शान झांकियों का परम्परागत रूप से चल समारोह इस वर्ष भी निकलना चाहिए। साथ ही मिलों की कमेटियों को पाँच-पाँच लाख की आर्थिक मदद करें एवं झांकियों के चल समारोह में शामिल अखाड़ों की भी आर्थिक मदद करें।
परमालिया ने आगे बताया कि भले ही चल समारोह का समय सीमित हो, पर हमारी परम्परा कायम रहना चाहिए। चल समारोह में पुलिस बैण्ड भी शामिल होना चाहिए जो श्रीगणेश  विसर्जन चल समारोह की झांकियों में सबसे आगे चले। गणश उत्सव का प्रारंभ 22 अगस्त से होकर 1 सितम्बर को विसर्जन समारोह के साथ समापन होगा।
गत वर्ष पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा ने झांकी कलाकारों का हौसला अफजाई करते हुए आईडीए, नगर निगम एवं विभन्न संस्थाओं से 5-5 लाख रुपए की आर्थिक मदद दिलवाई थी और स्वयं ने भी झांकी निर्माण में मदद दी थी।