छोटी लाइन फाटक चौराहे से मेडिकल रोड पर स्थित सूपाताल को पर्यटन विकास निगम ने कुछ साल पहले बड़ी गंभीरता से सँवारा और नया सा रूप दिया। 20 एकड़ के करीब इस तालाब को जब सुधारा गया तो पहाड़ी हिस्से, रोड से देखने में इसमें चार चाँद से लग गये, लेकिन अफसोस यह सुंदरता कुछ दिन ही टिक सकी। जैसे ही इस तालाब की देखरेख बनने के बाद नगर निगम के पास आई तो ननि ने एकदम अपने वर्क कल्चर की तरह कुछ महीनों तो छोड़िए कुछ दिनों के अंदर इसको ठिकाने लगा दिया। वैसे सच्चाई यह भी है की नगर निगम के अनदेखी करने वाले अधिकारियों के साथ यहाँ आसपास बसे कुछ लोगों ने भी तालाब की सुंदरता को मिटाने बराबरी से सितम किये हैं।

करीब बसे लोगों ने ऐसा लगता है जैसे तालाब के किनारे हिस्से को कचराघर समझ लिया है। अब हाल-फिलहाल यह स्थिति है कि तालाब जो कभी झील की शक्ल ले चुका था वह गंदगी से बजबजा रहा है। चारों ओर इसके कचरे के पैकेट, पाॅलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक का भण्डार सा जमा है। यहाँ सुबह के वक्त पाथ-वे पर सैर-सपाटा करने वाले किसी तरह घूमते हैं। इनको लेकिन गंदगी के बीच इसका खतरा जरूर रहता है कि ऑक्सीजन कम मिलेगी कोविड-19 का संक्रमण जरूर गंदगी की वजह से घेर सकता है। लोग कहते हैं कि हालात ऐसे हैं कि अंदर जो गंदगी है उसको देखकर महसूस किया जा सकता है कि नगर निगम सफाई विभाग का अमला यहाँ पर वर्षों से नहीं भटका है। न तो कोई सफाई करने वाला और न कोई इसकी देखरेख करने वाला है। बस तालाब में करोड़ों रुपए लगाकर बर्बाद करने के लिए ही छोड़ दिया गया है।

गढ़ा जोन के सफाई कर्मी सड़क की तो सफाई करते फिर भी दिख जाते हैं, लेकिन यह सफाई तालाब के अंदर जो पाथ-वे, आसपास का एरिया क्लीन रखना चाहिए उसकी ओर जाते तक नहीं हैं। तालाब में सुबह सैर करने वाले कहते हैं िक सफाई और देखरेख को लेकर कागजों में तो सब काम चल रहा है पर हकीकत में यहाँ पर कुछ भी नजर नहीं आता है। तालाब की हालत इसी तरह के नजरिए की वजह से एकदम बदतर हो गई है। झील की शक्ल का सुंदर तालाब जो रोड से निकनले वालों को आकर्षित करता है पर जैसे ही आदमी अंदर आता है तो इसकी दशा देखकर दु:खी हो जाता है। सालों से इसकी हालत खराब है पर नगर निगम के जिम्मेदार लगातार अनदेखी कर रहे हैं।