कब्ज पाचन तंत्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति (या जानवर) का मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग में कठिनाई होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है।
सामान्य आवृति और अमाशय की गति व्यक्ति विशेष पर निर्भर करती है। (एक सप्ताह में 7 से 12 बार मल निष्कासन की प्रक्रिया सामान्य मानी जाती है। कब्ज होने से शौच करने में बाधा उत्पन्न होती है, पाचनतंत्र प्रभावित होता है,जिसके कारण शौच करने में बहुत पीड़ा होती होती है ,किसी को केवल गैस की समस्या होती है. किसी को खाने का पाचन ठीक से नहीं हो पाता है। और आजकल कब्ज की समस्याओ से बच्चे और युवा पीढ़ी दोनों परेशान हो चुके है। व्यक्ति दो या तीन दिन तक शौच नहीं  हो पाता है।तो कब्ज की समस्या उत्पन्न हो जाती है।  
पेट में शुष्क मल का जमा होना ही कब्ज है। यदि कब्ज का शीघ्र ही उपचार नहीं किया जाये तो शरीर में अनेक विकार उत्पन्न हो जाते हैं। कब्जियत का मतलब ही प्रतिदिन पेट साफ न होने से है। एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में दो बार यानी सुबह और शाम को तो मल त्याग के लिये जाना ही चाहिये। दो बार नहीं तो कम से कम एक बार तो जाना आवश्यक है। नित्य कम से कम सुबह मल त्याग न कर पाना अस्वस्थता की निशानी है।[1]
हम जो खाना खाते हैं वह जब मलाशय से नहीं निकल पाता, तो कोलोन में ही जमा हो जाता है। यदि आपका पेट ठीक प्रकार  से साफ नहीं होता तो, आपको कोलोन इंफेक्शन होने का भी खतरा हो सकता है। यह वेस्‍ट मटीरियल यदि लंबे समय तक पेट में पड़ा रहे तो टॉक्‍सिक हो सकता है और आपकी हेल्‍थ को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इन टॉक्‍सिक पदार्थों को बाहर निकालना बहुत जरूरी है।
यदि आप इन्‍हें बाहर निकालेंगे तो आपका मेटाबॉलिज्‍म बढ़ेगा और आप अंदर से स्‍वस्‍थ और सुंदर बनेंगे। कई लोगों को पेट साफ न होने की वजह से मुंहासे आदि हो जाते हैं, जो कि इससे बिल्‍कुल ठीक हो सकते हैं।
वजन कम करने में मदद मिलती है। आपके समग्र मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज में सुधार। पेट के कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।इसका प्रमुख कारण लिवर का समुचित क्रिया न करना        प्रमुख कारण
कम रेशायुक्त भोजन का सेवन करना ; भोजन में फायबर का अभाव,,अल्पभोजन ग्रहण करना
शरीर में पानी का कम होनाकम चलना या काम करना ; किसी तरह की शारीरिक मेहनत न करना; आलस्य करना; शारीरिक काम के बजाय दिमागी काम ज्यादा करना ,कुछ खास दवाओं का सेवन करना,बड़ी आंत में घाव या चोट के कारण (यानि बड़ी आंत में कैंसर)थायरॉयड हार्मोन का कम बनना
कैल्सियम और पोटैशियम की कम मात्रा,मधुमेह के रोगियों में पाचन संबंधी समस्या,कंपवाद (पार्किंसन बीमारी)चाय, कॉफी बहुत ज्यादा पीन। धूम्रपान करना व शराब पीना,गरिष्ठ पदार्थों का अर्थात् देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करना,आँत, लिवर और तिल्ली की बीमारी
दु:ख, चिन्ता, डर आदि का होना,सही समय पर भोजन न करना।बदहजमी और मंदाग्नि (पाचक अग्नि का धीमा पड़ना),भोजन खूब चबा-चबाकर न करना अर्थात् जबरदस्ती भोजन ठूँसना। जल्दबाजी में भोजन करना।,बगैर भूख के भोजन करना,ज्यादा उपवास करना,भोजन करते वक्त ध्यान भोजन को चबाने पर न होकर कहीं और होना।
लक्षण ----सासों की बदबू,लेपित जीब,बहती नाक,भूख में कमी,सरदर्द,चक्कर आना,जी मिचलाना
चहरे पर दाने.मुँह में अल्सर,
पेट में लगातार परिपूर्णता
उपाय ---
रेशायुक्त भोजन का अत्यधित सेवन करना, जैसे साबूत अनाज
ताजा फल और सब्जियों का अत्यधिक सेवन करना
पर्याप्त मात्रा में पानी पीना
ज्यादा व्यायाम करना चाहिए जिससे शरीर में गतिविधिया बढ़ती है। कब्ज के समस्या नहीं होती है।
वसा युक्त भोजन का सेवन कम करे
अन्य उपाय
गार्सीनिया कंबोगिया
गार्सीनिया कंबोगिया आपकी भूख को दबाता है और आपके चयापचय को बढ़ाता है। यह न केवल आपके शरीर से सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, बल्कि शरीर के वजन को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। आप गार्सिनिया कंबोगिया को अपने दैनिक आहार में भी शामिल कर सकते हैं। इसे 1 से 2 बार रोजाना लेने से पेट साफ हो जाएगा।यह इंडोनेशिया में मिलता हैं .
सेब का जूस
सेब में पेक्टिन (फाइबर) अघुलनशील और घुलनशील गुण होते हैं। यह आपके मल को भारी बनाने में मदद करता है और इसे पास करना आसान बनाता है। यह आपके वजन घटाने के प्रयासों में सहायता कर सकता है। इसके अतिरिक्त, सेब पेट के कैंसर की कोशिकाओं के विकास को भी  रोक सकता है। इसका उपयोग करने के लिए 1 सेब लें और 1 कप पानी के साथ ब्‍लेंड कर लें। फिर इसको छान लें या फिर ऐसे ही पी जाएं। ऐसा आपको रोजाना करना होगा।
लेमन डिटॉक्स ड्रिंक
नींबू विटामिन सी से भरपूर होता है, जो चयापचय को बढ़ाता है और शरीर से गंदगी को बाहर निकालने में मदद करता है। नींबू एक प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट है, जो आपके शरीर को फ्री रैडिकल्‍स से बचाता है। एक अध्ययन के अनुसार, लेमन डिटॉक्स डाइट भी शरीर में वसा को कम कर सकता है। इसे लेने के लिए 1 गिलास गुनगुने पानी में, 1/2 नींबू और 1-2 चम्मच शहद मिलाएं। इसे रोज सुबह खाली पेट पिएं।
नोट: चूंकि नींबू अम्लीय होता है और दांतों पर असर डाल सकता है, इसलिए इसे रोकने के लिए नींबू के सेवन के बाद अपने मुंह को सादे पानी से कुल्ला करना न भूलें।
दही
दही एक प्राकृतिक प्रोबायोटिक है, जो आंत के हेल्‍दी बैक्‍टीरिया का ख्‍याल रखता है। इससे पाचन की समस्‍या दुरुस्‍त होती है। दही का दैनिक सेवन आपके शरीर में प्रोबायोटिक्स के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है, जो बदले में, आंत को शुद्ध करने में मदद कर सकता है। प्रतिदिन 1 से 2 बार बिना चीनी या फल के सादा दही लें।
कच्ची सब्जी का जूस
कच्ची सब्जियों से निकाला गया जूस पीना आपके कोलन को साफ करने और आपके शरीर को डिटॉक्स करने में काफी मददगार है। इसकी के साथ यह वेट को भी बैलेंस करने में मदद करता है। दिन में कई बार आपको अपनी डाइट में पालक, चुकंदर, गाजर, टमाटर और ककड़ी का रस पीना चाहिए। नोट: डिब्बाबंद या तैयार किए गए रस से बचें, क्योंकि उनमें पोषक तत्वों और खनिजों की कमी होती है।
सेब का सिरका
एप्पल साइडर विनेगर में एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबायोटिक गुण होते हैं, जो आंत और मलाशय के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। एप्‍पल साइडर विनेगर में एसिटोबैक्टर नामक बैक्टीरिया की उपस्थिति होती है, जो पाचन में सहायता करता है और आपके पेट के लिए उचित कार्य करता है। यह पेट में एसिड नहीं बनने देता और वजन कम करने में मदद करता है।
 इन जरूरी बातों का भी रखें ख्‍याल
जितना हो तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाएं। तंबाकू के सेवन से बचें। शराब का सेवन कम करें। 50 वर्ष की आयु के बाद, नियमित हेल्‍थ चेकअप करवाएं खासतौर पर कोलोन कैंसर के लिए। फाइबर, अनाज, साबुत अनाज, चोकर, दलिया, फल, और सब्जियों से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। यह आपके मल त्याग को बढ़ाने और पेट के स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद कर सकता है। कोलन इंफेक्शन से बचाने में मदद करेंगी यह ड्रिंक्स
इसबगोल की की भूसी कब्ज में परम हितकारी है। दूध या पानी के साथ २-३ चम्मच इसबगोल की भूसी रात को सोते वक्त लेना फ़ायदे मंद है। दस्त खुलासा होने लगता है।यह एक कुदरती रेशा है और आंतों की सक्रियता बढाता है
अमरूद और पपीता ये दोनो फ़ल कब्ज रोगी के लिये अमॄत समान है। ये फ़ल दिन में किसी भी समय खाये जा सकते हैं। इन फ़लों में पर्याप्त रेशा होता है और आंतों को शक्ति देते हैं। मल आसानी से विसर्जीत होता है।
अंगूर में कब्ज निवारण के गुण हैं। सूखे अंगूर याने किश्मिश पानी में ३ घन्टे गलाकर खाने से आंतों को ताकत मिलती है और दस्त आसानी से आती है। जब तक बाजार में अंगूर मिलें नियमित रूप से उपयोग करते रहें।
बड़ी मुनक्का पेट के लिए बहुत लाभप्रद होती है। मुनका में कब्ज नष्ट करने के तत्व हैं। ७ नग मुनक्का रोजाना रात को सोते वक्त लेने से कब्ज रोग का स्थाई समाधान हो जाता है। एक तरीका ये हैं कि मुनक्का को दूध में उबालें कि दूध आधा रह जाए | गुन गुना दूध सोने के आधे घंटे पाहिले सेवन करें। मुनक्का में पर्याप्त लोह तत्व होता है और दूध में आयरन नहीं होता है इसलिए दूध में मुनक्का डालकर पीया जाय तो आयरन की भी पूर्ती हो जाती है।
कुमारीआसव और अभयारिष्ट --दोनों चार   चार चमच्च भोजन के बाद पानी से सुबह शाम
ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।