वाराणसी. कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते पूरे देश में लॉकडाउन (Lockdown) घोषित है. उधर, गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करने वाला शहर बनारस (Varanasi) की कई खूबियां हैं. इन्हीं खूबियों में एक है बनारस की ईद वाली सेवइयां जो पूरे यूपी में प्रसिद्ध हैं. खास बात ये हैं कि इन सेवइयों को बनाने वाले हिन्दू परिवार रहते हैं जो बड़े ही बारीकी से ईद की महीन सेवइयां तैयार करते हैं. इस बार ईद पर इन परिवारों पर भी कोरोना प्रत्यक्ष रूप असर पड़ा है. जहां सिर्फ 25 फीसदी की बिक्री हो पाई है, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
बनारस के प्रहलाद घाट स्थित इस मोहल्ले में ईद की सेवइयां तैयार होती है जो पूरे पूर्वांचल में अपना स्वाद बिखेरती हैं. कारोबारी देवेंद्र केसरी बताते हैं कि सिर्फ एक महीने का कारोबार इस मोहल्ले से करोड़ो का होता है. भले ही इन सेवइयों को हिन्दू परिवार बनाता हो लेकिन मुस्लिम परिवार बावजूद इसके यही के सेवइयों को पसंद करते हैं और हर साल ईद पर पूरे पूर्वांचल में सेवइयों की डिमांड में होती हैं.
कई दशकों इस सेवाई का व्यापार करने वाले व्यापारी अमृतलाल ने बताया कि कोरोना से बचाव के लिए लॉकडाउन ने इस व्यापार की इस बार कमर तोड़ दी है. जिस बाजार में हर वर्ष करोड़ों की सेवइयां बिक जाती थी आज वो लाखों में सिमट के रह गयी है. ईद आने में अब सिर्फ दो दिन ही बचे हैं लेकिन इस बाजार में अब तक सिर्फ 25 प्रतिशत की ही बिक्री हो पाई है. वो भी स्थानीय स्तर पर. उन्होंने बताया कि इसकी सीधा असर मजदूर वर्ग को हुआ है क्योंकि इस मौसम में जिस कारखाने में दर्जनों मजदूर लगते थे आज वहां दो चार से ही काम चलाना पड़ रहा है.
हालांकि ये बाजार अभी भी उम्मीद की उन किरणों के सहारे इस बार के घाटे को मजबूती से बर्दाश्त किया. जिसमें उन्हें उम्मीद है कि एक बार फिर सूरज की किरणें नया सेवरा लाएंगी और इस बाजार में फिर रौनक लौटेगी.