जीवन में मां सीता ने काफी संघर्ष किया। विवाह के तुरंत बाद 14 वर्षों का वनवास और फिर वनवास के दौरान रावण ने मां सीता का अपहरण कर लिया। राम ने जब रावण का वध किया तो उसके बाद मां सीता को अग्नि परिक्षा से गुजरना पड़ा। मां सीता के जीवन में बहुत सी कठीन परिस्थितियां आई पर मां ने कभी हार नहीं मानी। हालात कैसे भी हो मां नें हमेशा उनका डट कर सामना किया।मां सीता ने एक मिसाल कायम करी व्यक्ति को कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। मां सीता के व्यक्तित्व और गुणों से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। आइए, जानते हैं सीता मां की 4 बातें, जिनको अगर हम अपने जीवन में अपना लेंगे तो कभी भी असफल नहीं होंगे....
 
त्याग की भावना
वनवास र्सिफ प्रभु श्री राम को मिला था परंतु मां सीता ने अपना पतिव्रता धर्म निभाते हुए महलों का सुख त्याग कर भगवान श्री राम के साथ वन जाने का निर्णय लिया और हर पल उनका साथ दिया। मां सीता ने एक बार भी नहीं सोचा वो वन में कैसे रहेंगी।
 
सभी कार्यों में निपुण
मां सीता सिर्फ गृहणी नहीं थी, वो भगवान श्री राम के साथ सभी कार्यों में उनका साथ दिया करती थी। वनवास के दौरान मां सीता और लक्ष्मण जी ने भगवान का पूरा साथ दिया।

 मां सीता का साहसी व्यक्तित्व और भगवान श्री राम पर भरोसा
रावण ने अपहरण कर मां सीता को अशोक वाटिका में रख था, जहां रावण ने माता सीता को हर तरह से परेशान करने की कोशिश की थी। परंतु मां सीता ने रावण को डटकर सामना किया। मां सीता को भगवान श्री राम पर भरोसा था कि वो आएंगे और उन्हें रावण के इस बंधन से छुड़ा लेंगे।

मां सीता का विश्वास
हनुमान जी जब मां सीता के पास पहुंचे और उन्हें राम जी की अंगुठी दी तब मां सीता का विश्वास और बढ़ गया कि अब राम जी जल्दी आएंगे और उन्हें यहां से ले जाएंगे। मां सीता का विश्वास और बढ़ गया जब हनुमान जी ने अपनी शक्ति का परिचय मां सीता को दिया।