कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर के बर्रा से अगवा युवक के परिवार पर उस वक्त बड़ी आफत टूट पड़ी जब अपहरणकर्ताओं को फिरौती के 30 लाख रुपए दे दिए इसके बाद भी अपहृत युवक को पुलिस छुड़ा नहीं सकी। सोमवार देर रात बदमाशों के बताई जगह पर रुपयों भरा बैग फेंका गया, अपहरणकर्ता बैग लेकर निकल गए पर युवक को नहीं छोड़ा। परिजनों का आरोप है कि पुलिस की निगरानी में पैसे दिए गए। पीड़ित परिवार ने एसएसपी कार्यालय पर मंगलवार को हंगामा किया। वहीं, रात को एसएसपी ने बर्रा थाने का जायजा लेकर पीड़ित के परिजनों से बातचीत की।

कानपुर के बर्रा-5 निवासी लैब टेक्नीशियन का 22 जून को अपहरण हो गया था। उनके परिवार वालों को फोन कर बदमाशों ने तीस लाख की फिरौती मांगी। इसकी जानकारी परिजन लगाकर एसपी साउथ व बर्रा इंस्पेक्टर को रिकॉर्डिंग के साथ दे रहे थे। आरोप है कि पुलिस के कहने पर उन्होंने सोमवार देर रात अपहरणकर्ताओं के बताए पते पर गुजैनी हाईवे से झांसी रेलवे लाइन के पास पुल से 30 लाख रुपए से भरा बैग नीचे फेंका। पुलिस 100 मीटर दूरी से अपहरणकर्ताओं पर नजर बनाए हुए थीं लेकिन वह उन्हें चकमा देकर रुपयों भरा बैग लेकर भाग निकले। बेटे के न मिलने पर परिजनों ने बर्रा पुलिस पर अपहरणकर्ताओं से मिलीभगत का आरोप लगाया है।

मकान और शादी के जेवर तक बेचे
बेटे को छुड़ाने के लिए माता-पिता ने अपने जेवर और मकान तक बेच दिया था। बहन ने एसएसपी ऑफिस में बिलखते हुए कहा कि घर और खेती बेचने के साथ ही रिश्तेदारों से किसी तरह उधार रुपए लेकर भाई को छुड़ाने की व्यवस्था की थी।

लगातार आए फोन, ट्रेस न कर पाई पुलिस
परिजनों का आरोप है कि अपहरणकर्ता के 29 जून से लगातार फोन कर रहे थे। उन्होंने पुलिस को न केवल जानकारी दी बल्कि हर कॉल की रिकॉर्डिंग तक मुहैया कराई। इतना सब कुछ होने के बावजूद पुलिस ट्रेस नहीं कर पाई।

विश्वास में कर्ज लेकर रकम भी गंवाई
अपहृत युवक की बहन का आरोप है कि जब अपहरणकर्ताओं ने फिरौती की रकम न देने पर भाई को भूल जाने की धमकी दी तो उन्होंने पुलिस को इसकी जानकारी दी। इस पर पुलिस ने परिवार पर विश्वास में लेते हुए अपहरणकर्ताओं को रकम देने को कहा था। पुलिस के कहने पर ही पिता पुलिस के दिए हुए बैग में रुपए लेकर अपहरणकर्ताओं को देने गए।

ट्रैक करने को बैग में डाला था मोबाइल
युवक के पिता ने बताया कि फिरौती की रकम देने के लिए पुलिस ने अपना एक बैग और उसमें एक मोबाइल भी रखा था। इससे अपहरणकर्ताओं को ट्रेस किया जा सके लेकिन अब पुलिस कह रही है कि बैग पुल से फेंकने की वजह से उसमें रखा मोबाइल ऊंचाई से गिरकर टूट गया जिसकी वजह से उन्हें ट्रैक नहीं किया जा सका।

चकरपुर से अपहरणकर्ताओं ने लिया था सिमकार्ड
चकरपुर मंडी में काम करने वाली नौबस्ता खाड़ेपुर निवासी महिला ने 26 जून को चकरपुर की एक शॉप से सिमकार्ड लिया था। दुकानदार ने धोखे से उसकी आईडी पर ही एक और सिम एक्टीवेट कर लिया और किसी को बेच दिया। इसी सिमकार्ड से अपहरणकर्ताओं ने युवक के परिजनों से फिरौती मांगी। हालांकि पुलिस ने महिला को पकड़ा तो उसने पूरा मामला बताया जिसके बाद पुलिस ने दुकानदार भी पकड़ा जिसे पांच-छह दिन बाद छोड़ दिया गया। अपहरणकर्ता ने युवक के पिता से लगातार फोन पर संपर्क करते हुए फिरौती की रकम मंगाने के लिए पहले बर्रा, तात्याटोपे नगर फिर पनकी लोहिया चौराहा और इसके बाद अचानक गुजैनी-झांसी रेलवे लाइन के पास बुला लिया।

इस प्रकरण में दो तरह से तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस कह रही है बैग में पैसा नहीं था। परिजन कह रहे हैं कि पैसा था। इस प्रकरण को मैं खुद मॉनीटर कर रहा हूं। यदि इस मामले में पुलिस कर्मी दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - दिनेश कुमार पी, एसएसपी

फिरौती की रकम अपहरणकर्ताओं को पुलिस के सामने देने की बात सरासर गलत है। ऐसा संभव नहीं है कि पुलिस के सामने अपहरणकर्ता निकल जाएं। परिजन मानसिक रूप से परेशान हैं। उन्हें विश्वास में लिया गया है। प्रयास किया जा रहा है कि युवक को जल्द से जल्द बरामद किया जाए। - अपर्णा गुप्ता, एसपी साउथ

कानपुर में अपहरण की घटना के बाद बेबस व मजबूर परिजनों द्वारा सूचित करने के बावजूद पुलिस के सामने से फिरौती की रकम ले जाने वालों के ऊपर आख़िर किसका हाथ है कि उन्हें पुलिस का भी डर नहीं है। लगता है उप्र की भाजपा सरकार की नैतिकता का ही अपहरण हो गया है। - अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री