मध्य प्रदेश के सबसे बड़े एमवाय अस्पताल की मरच्यूरी रूम में महीनों से स्ट्रेचर पर रखा एक शव अपने अंतिम संस्कार का इंतजार करते-करते कंकाल बन गया। ताज्जुब यह कि जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। कोरोना काल में, जबकि मरच्यूरी में शवों के आने-जाने का सिलसिला लगातार बना हुआ है, इस घटना से अस्पताल में कोरोना की गाइडलाइन के पालन पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
मरच्यूरी के कर्मचारियों का कहना है कि शव के रखे-रखे जब उससे बदबू आने लगी तो उन्होंने कई बार इसकी शिकायत की, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। अस्पताल प्रबंधन अब कह रहा है कि शव की पहचान नहीं हो पाई थी, लेकिन अज्ञात शवों के निष्पादन की भी एक प्रक्रिया है। इससे स्पष्ट है कि अस्पताल में उस प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया।
कोई अज्ञात शव अगर पुलिस बरामद करती है तो पोस्टमार्टम के लिए उसे एमवाय अस्पताल की मरच्यूरी रूम में भेजा जाता है। शव के पोस्टमार्टम के बाद 3 दिनों तक अगर उसकी शिनाख्त नहीं होती है तो नगर निगम और एनजीओ के माध्यम से उसका अंतिम संस्कार किया जाता है। इस शव के कंकाल होने पर भी अब तक तो ना इसका पोस्टमार्टम हो पाया और ना ही पुलिस विभाग द्वारा इस पर कोई संज्ञान लिया गया।