पुलवामा हमला और वायुसेना के विंग कमाण्डर अभिनन्दन की रिहाई के बीच बदले माहौल में आतंकी संगठन यूपी में कोई बड़ी वारदात कर सकते हैं। पुलवामा हमले के बाद से ही यह आशंका तेज हो गई थी। देवबंद से गिरफ्तार आतंकी शाहनवाज तेली और आकिब से सात दिन की पूछताछ में मिली जानकारियों की कड़ी से कड़ी मिलाई गई तो ऐसी ही कई जानकारियां कुछ सुबूतों के तौर पर सामने आईं। 

एटीएस ने भी यह स्वीकार किया कि आतंकी संगठन ऐसा कुछ कर सकते हैं। इनके मंसूबों को नाकाम करने के लिए एटीएस की कई इकाइयां जुटा दी गई हैं। दोनों आतंकी सात दिन से एटीएस के पास रिमाण्ड पर हैं। उन्हें पूछताछ के लिए सहारनपुर और जम्मू-कश्मीर भी ले जाया जाना था। जम्मू तक हवाई मार्ग बंद होने की वजह से एटीएस उन्हें कश्मीर नहीं ले जा पायी है। यही वजह है कि दोनों आतंकियों के पास मिले तीनों मोबाइल से जो जानकारियां हासिल हुईं और लगातार पूछताछ से जो तथ्य हाथ लगे, उनसे यही पता चल रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद का एरिया कमाण्डर यूपी में किसी हमले का ताना-बाना बुन चुका था।

युवकों को जिहादी बना रहा था
इस एरिया कमाण्डर के कहने पर ही शाहनवाज और आकिब सहारनपुर व अन्य शहरों के युवाओं को अपने जाल में फंसाकर जिहाद से जुड़े वीडियो व ऑडियो दिखा रहे थे। कुछ युवकों को इन लोगों ने गुमराह भी कर दिया था पर उन्हें अभी तक अपने संगठन में शामिल नहीं कर सके थे। एटीएस के आईजी असीम अरुण ने सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा लेकिन यह जरूर स्वीकार किया कि ये लोग कुछ न कुछ तो साजिश यूपी के लिए रच रहे थे।

सहारनपुर, मेरठ और लखनऊ कई  बार आये
दोनों आतंकियों ने यह कबूला कि जैश के सम्पर्क में रहने वाले कुछ युवक कई बार लखनऊ आये। इसके अलावा ये लोग सहारनपु और मेरठ भी कई बार गये। सहारनपुर के देवबंद को तो इन लोगों ने अपनी शरणगाह बना लिया था।

देवबंद में कैसे रह रहे थे
आतंकी घटना की आशंका को देखने के बाद एटीएस ने इस ओर ज्यादा ध्यान लगा दिया है कि आखिर बिना लिखा-पढ़ी के शाहनवाज और आकिब देवबंद में कैसे रह रहे थे। इन्हें किसकी शह मिली हुई थी।