जबलपुर। शासकीय शालाओं में अध्यनरत गरीब तबके के बच्चों के लिये एंड्रायड मोबाइल फोन के माध्यम से कराई जा रही ऑनलाइन पढ़ाई मजाक बन गई है, शासकीय स्कूलों में ऐंसे ज्यादातर बच्चे हैं। जिनके पास एंड्रायड मोबाइल फोन नहीं है। जिसके कारण ऑनलाईन क्लास से कम बच्चे जुड़ रहे हैं। जिनका फीडबैक बनाने में शिक्षक भी परेशान हो रहे हैं। इस बीच अविभावकों के जबाव से भी शिक्षक परेशान है। मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग शाासकीय कर्मचारी संघ के प्रांतीय सचिव रॉबर्ट मार्टिन ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद प्रदेश के विद्यालय बंद है, परंतु शासकीय विद्यालय में इन दिनों स्माईल कार्यक्रम, रेडियो एवं टेलीविजन के माध्यम से बच्चों को घर पर ही रहकर अध्ययन करने के आदेश है। प्रतिदिन सुबह नौ बजे, हर घर स्कूल की घंटी बजे अभियान के तहत स्माइल कार्यक्रम के अंतर्गत ऑनलाईन स्मार्ट फोन के माध्यम से बच्चों को पढऩा होता है। जिसके लिये प्रतिदिन शिक्षकों द्वारा अविभावकों को कॉल कर ५ बच्चों का फीडबैक तैयार किया जाता है। हर शिक्षक बच्चों को फोन पर एक ही बात कहता है कि टीवी पर पढ़ाई के कार्यक्रम को देखा क्या, वाट्सअप पर लिंक को खोला क्या? बच्चों ने लैसन तैयार किया, ई लर्निंग प्रोग्राम कैसा लगा परंतु अविभावकों के साथ परेशानी यह है कि इस संकट भरे कोरोना काल में बच्चों का पेट पाले या स्मार्ट फोन खरीदें। शिक्षकों के कॉल का पालकों द्वारा बड़े ही बेढंग्गे तरीके अजीबो गरीब जवाब दिया जाता है। राज्य शिक्षा केन्द्र के आला अधिकारी वातानुकूलित चेम्बर में बैठ कर नित नये नियम बनाते हैं। वे गरीब पालकों और उनके बच्चों के जमीनी स्तर के रहन सहन से अनभिज्ञ हैं जो गरीब पालक गुग्गी झोपड़ी में रह कर जैसे तैसे अपना गुजारा कर रहे हैं। उनके पास तीन टाईम खाने को पर्याप्त नहीं है तो स्मार्ट फोन कहां िसे खरीदेंगे। ऐसे में उन पालकों के बच्चों से शासन या विभाग कैसे उम्मीद कर सकता है कि ये डिजिटल पढ़ाई कर सके। जब पालकों से शिक्षक फोन पर संपर्क करता है तो पालक जिनके पास माबाईल फोन है वे अपने साथ काम पर ले जाते है। जिससे वे बच्चों को ऑनलाईन स्मार्ट फोन की टीचिंग में हिस्सा लेने के लिये उपलब्ध नहीं होते। संघ के अर्वेन्द्र राजपूत, अवधेश तिवारी, रॉबर्ट मार्टिन, आलोक अग्रिहोत्री, कमलेश यादव, पंकज शर्मा, राकेश तिवारी, रमाकांत वाजपेयी, मीनूकांत शर्मा, आशुतोष तिवारी, जियाउर्रहीम, दुर्गेश पांडेय, स्टेनली नॉबर्ट ने कलेक्टर से मांग की है कि ऑनलाईन टीचिंग में अविभावकों की असुविधाओं को ध्यान में रखते हुये इसे बंद किया जाये।