बस्ती। सनातन धर्मी संस्था द्वारा आयोजित 10 दिवसीय श्रीराम लीला महोत्सव के तीसरे दिन अयोध्या धाम से आये श्री धनुषधारी आदर्श रामलीला समिति के कलाकारों ने मुनि विश्वामित्र के आगमन, ताडका बध, सुबाहु बध, अहिल्या उद्धार, जनकपुरी में फुलवारी भ्रमण का मंचन किया गया। व्यास कृष्ण मोहन पाण्डेय ने कथा सूत्र पर प्रकाश डालते हुये दर्शकों को बताया कि  मुनि विश्वामित्र अयोध्या पहुंचे और राजा दशरथ से श्रीराम और लक्ष्मण को यज्ञ रक्षा के लिये मांगा।
प्रभु श्री राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के बड़े होने पर अयोध्या में मुनि विश्वामित्र का आगमन होता है। राजा दशरथ उनका खूब स्वागत सत्कार करते हैं। मुनि विश्वामित्र राजा दशरथ को बताते हैं कि वन में जब वे यज्ञ करते हैं तो राक्षस उन्हें तहस-नहस कर देते हैं। इसलिए वे यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से श्री राम और लक्ष्मण को साथ भेजने की बात कहते हैं। यह सुन राजा दशरथ श्री राम-लक्ष्मण को भेजने से अस्वीकार कर देते हैं। वे कहते हैं कि वे यज्ञ की रक्षा के लिए पूरी सेना ले जाएं लेकिन श्री राम और लक्ष्मण को नहीं। गुुरु वशिष्ठ के समझाने पर राजा दशरथ श्री राम और लक्ष्मण को मुनि विश्वामित्र के साथ भेज देते हैं।  मुनि विश्वामित्र ने रास्ते में श्री राम और लक्ष्मण को बताया कि इस जंगल में ताड़का नाम की राक्षसी का आतंक है जो लोगों को खा जाती है। इसी दौरान उनका सामना ताड़का से हो जाता है। ताड़का उन्हें देख उन पर आक्रमण कर देती है। इस पर श्री राम ताड़का का वध कर देते हैं। ताड़का के  वध के बाद मुनि विश्वामित्र श्री राम और लक्ष्मण को लेकर आश्रम आ जाते हैं। मुनि विश्वामित्र आश्रम में शिष्यों के साथ यज्ञ कर रहे थे। यज्ञ की रक्षा के लिये श्री राम और लक्ष्मण प्रस्तुत रहते हैं। इसी दौरान मारीच और सुबाहु नाम के राक्षस यज्ञ को नष्ट करने के लिए पहुंच जाते हैं। श्री राम लक्ष्मण से उनका भीषण युद्ध होता है। अंत में श्री राम लक्ष्मण दोनों राक्षसों का  वध कर देते हैं।
दशरथ की भूमिका में प्रेम नारायण, विश्वामित्र की भूमिका में उमेश झा, श्रीराम की भूमिका में ज्ञान चन्द्र पाण्डेय, लक्ष्मण की भूमिका में राजा बाबू और माता सीता की भूमिका में मोनू पाण्डेय ने मंच पर श्रीराम लीला को जीवन्त किया। श्रीराम दरबार की आरती के साथ आरम्भ श्रीराम लीला में दर्शक जमे रहे। नरेन्द्र शुक्ल ने श्रीराम महिमा के विविध विन्दुओं पर प्रकाश डाला। कहा कि श्रीराम कथा के श्रवण, दर्शन से जीवन का दुःख दूर होता है।  रामलीला के कलाकारों ने दर्शकों का मन मोह लिया। ताडका बध, सुबाहु बध, अहिल्या उद्धार के प्रसंगों ने जहां लोगों को बांधे रखा वही जनकपुर के फुलवारी प्रसंग में दर्शकों को मनोहारी दृश्यों का दर्शन हुआ। दर्शकों में  विवेक मिश्र, सन्तोष पाल, योगेश शुक्ल, रमेश सिंह, आमोद उपाध्याय, हरि प्रसाद पाण्डेय, आशीष शुक्ल, सुभाष शुक्ल, वृजेश सिंह मुन्ना, अखिलेश दुबे, प्रशान्त पाण्डेय, डा. डी.के. गुप्ता, डा. शैलेन्द्र त्रिपाठी, पवन तुलस्यान, रघुनन्दन राम साहू, अभय त्रिपाठी, भोलानाथ चौधरी, राहुल त्रिवेदी, पवन मौर्य के साथ ही बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे। संचालन पंकज त्रिपाठी ने किया।