नई दिल्ली | आत्महत्या के लिए उकसाने के दो साल पुराने मामले में गिरफ्तार रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्बन गोस्वामी की अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज यानी बुधवार को सुनवाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट के जज धनन्जय वाई चंद्रचूड़ और जज इन्दिरा बनर्जी की पीठ अर्नब गोस्वामी की अंतरिम जमानत की अपील पर सुनवाई कर रही है। दरअसल, रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक को अंतरिम जमानत देने से इनकार करने के बंबई उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अर्नब की अपील दायर होने के कुछ घंटों के भीतर ही शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री ने इसे आज के लिए यानी 11 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। अधिवक्ता निर्निमेष दुबे के माध्यम से दायर इस अपील पर सुप्रीम कोर्ट सुबह साढ़े दस बजे से सुनवाई कर रहा है।
- उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकारों द्वारा विचारधारा, मतभेदों के आधार पर लोगों को निशाना बनाए जाने को लेकर चिंता व्यक्त की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम लगातार ऐसे मामले देख रहे हैं जहां उच्च न्यायालय लोगों को जमानत नहीं दे रहा और उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने में नाकाम रहा है।

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकार किसी व्यक्ति को निशाना बनाती है तो उसे पता होना चाहिए कि नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए शीर्ष अदालत है।

-उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर संवैधानिक अदालत हस्तेक्षप नहीं करती तो, हम निश्चित रूप से विनाश की राह पर चल रहे हैं।

-उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हमारा लोकतंत्र असाधारण रूप से लचीला है, महाराष्ट्र सरकार को इन सब (टीवी पर अर्नब के तानों) को अनदेखा करना चाहिए।

-अर्नब गोस्वामी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला: उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर किसी की निजी स्वतंत्रता का हनन हुआ तो वह न्याय पर आघात होगा।

-उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र से पूछा कि क्या अर्नब गोस्वामी के मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जरूरत है? कोर्ट ने आगे कहा,' हम व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दे से निपट रहे हैं।'

-अर्नब की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, 'अगर हम एक संवैधानिक न्यायालय के रूप में स्वतंत्रता की रक्षा नहीं करेंगे, तो कौन करेगा?... अगर कोई राज्य किसी व्यक्ति को टारगेट करता है, तो हमें एक मजबूत संदेश देने की आवश्यकता है... हमारा लोकतंत्र असाधारण रूप से लचीला है।
-अर्नब गोस्वामी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश सीनियर वकील हरीश साल्वे ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की।
-अर्नब की जमानत याचिका पर बहस के दौरान हरीश साल्वे ने कहा कि द्वेष और तथ्यों को अनदेखा करते हुए राज्य की शक्तियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। हम एफआइआर के चरण से आगे निकल गए हैं। इस मामले में मई 2018 में एफआइआर दर्ज की गई थी। दोबारा जांच करने के लिए शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।

- अर्नब गोस्वामी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलील रख रहे हैं और उन्होंने अर्नब के खिलाफ दर्ज एफआईआर का विरोध किया है और इसे गलत बताया है।

-सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।

-सुप्रीम कोर्ट में अर्नब की याचिका पर सुनवाई शुरू

बंबई उच्च न्यायालय ने नौ नवंबर को अर्नब गोस्वामी और दो अन्य को अंतरिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि उन्हें राहत के लिए निचली अदालत जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर आरोपी अपनी 'गैरकानूनी गिरफ्तारी' को चुनौती देते हैं और जमानत की अर्जी दायर करते हैं तो संबंधित निचली अदालत चार दिन के भीतर उस पर निर्णय करेगी। अर्णब ने शीर्ष अदालत में दायर अपील में महाराष्ट्र सरकार के साथ ही अलीबाग थाने के प्रभारी, मुंबई के पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह को भी पक्षकार बनाया है।

इस बीच, महाराष्ट्र सरकार ने भी अपने अधिवक्ता सचिन पाटिल के माध्यम से न्यायालय में कैविएट दाखिल की है ताकि उनका पक्ष सुने बगैर गोस्वामी की याचिका पर कोई आदेश नहीं दिया जाये। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के अलीबाग थाने की पुलिस ने चार नवंबर को, इंटीरियर डिजायनर की कंपनी की बकाया राशि का कथित रूप से भुगतान नहीं करने के कारण अन्वय नाइक और उनकी मां को कथित रूप से आत्महत्या के लिये बाध्य करने के मामले में, अर्नब को गिरफ्तार किया था।  

उच्च न्यायालय का अंतरिम राहत के मामले में फैसला आने से पहले ही अर्नब ने अपनी नियमित जमानत के लिए अलीबाग की सत्र अदालत में आवेदन दायर कर दिया था। उच्च न्यायालय ने गोस्वामी और दो अन्य आरोपियों फिरोज शेख और नितीश सारदा की अंतरिम जमानत के आवेदन अस्वीकार करते हुये कहा था कि यह असाधारण अधिकार क्षेत्र के इस्तेमाल का कोई मामला नहीं बनता है। यह प्राथमिकी निरस्त करने के लिये दायर याचिका पर उच्च न्यायालय 10 दिसंबर को सुनवाई करेगा।

अर्नब गोस्वामी सहित तीनों आरोपियों को चार नवंबर को देर रात एक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था जिन्होंने उन्हें पुलिस हिरासत में देने से इंकार करते हुये 18 नवंबर तक के लिये न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अर्बन गोस्वामी को शुरू में अलीबाग जेल के लिए बनाये गये कोविड-19 सेंटर में रखा गया था लेकिन कथित रूप से मोबाइल इस्तेमाल करते पाये जाने के कारण उन्हें रायगढ़ की तलोजा जेल शिफ्ट कर दिया गया।

इस बीच, रिपब्लिक टीवी के कंसल्टिंग संपादक प्रदीप भंडारी ने रविवार को प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे को एक पत्र लिखकर गोस्वामी को तलोजा जेल स्थानांतरित किये जाने और खतरनाक अपराधियों के बीच रखे जाने का संज्ञान लेने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि अर्नब गोस्वामी की जान को खतरा है और उन्हें रविवार की सुबह पीटा गया है।