नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कोविड-19 के मद्देनजर केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सीबीएसई की परीक्षाओं के रद्द होने के कारण छात्रों का आकलन करने के लिए मंजूर की गई व्यवस्था सुधार परीक्षाएं देने वाले छात्रों पर भी लागू होगी क्योंकि वे भी महामारी से एक समान पीड़ित हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि नियमित छात्रों की तरह, जो लोग सुधार परीक्षा के लिए उपस्थित हुए थे, वे भी आकलन योजना के अनुसार प्राप्तांक का लाभ उठाने के हकदार होंगे या सीबीएसई द्वारा आयोजित वैकल्पिक परीक्षा के लिए उपस्थित होंगे। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि छात्र ने पूरे एक वर्ष का त्याग किया और साथ ही दो विषयों में अपने अंकों में सुधार किया, जो कि पिछले वर्ष में अर्जित अंक से अधिक थे, अदालत की राय में, ऐसा कोई कारण नहीं है कि नियमित छात्रों से अलग उनके साथ अलग तरह का व्यवहार क्यों होना चाहिए। हाईकोर्ट का यह आदेश एक उस छात्र संयम गुप्ता की याचिका पर आया है जिसने फरवरी-मार्च, 2019 में 12वीं कक्षा की परीक्षा दी थी और 95.25 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। इसके बाद, अपने अंकों में सुधार करने के लिए उन्होंने एक वर्ष छोड़ दिया और 2020 में सुधार परीक्षा के लिए अकाउंटेंसी, अंग्रेजी कोर, अर्थशास्त्र और बिजनेस स्टडीज की परीक्षाएं फिर से देना का फैसला किया।अन्य परीक्षाएं हालाकि तय कार्यक्रम के अनुसार हुईं, लेकिन 24 मार्च को प्रस्तावित बिजनेस स्टडीज परीक्षा को कोविड-19 के कारण लगाए गए लॉकडाउन के कारण रद्द कर दिया गया था।