बार्सिलोना । प्यार करने की कोई उम्र हो सकती है शायद नहीं यह तो किसी भी उम्र में हो जाता है। यह बात बार्सिलोना के स्टार फुटबॉलर लुइस सुआरेज की कहानी पर सटीक बैठती। सुआरेज को उनकी पत्नी ने 15 साल की उम्र में यह एहसास दिलाया था कि वह फुटबॉल के लिए बने हैं। उन्हीं की बदौलत आज सुआरेज दुनिया के सबसे कामयाब फुटबॉलर्स में शुमार हैं और फैंस के दिलों पर राज करते हैं। छह साल की उम्र में लुइस सुआरेज ने फुटबॉल खेलना पसंद किया जब वह अपने घरेलू शह सालटो को छोड़कर मोतेविडो आ गए। यहां सुआरेज की मां ने उन्हें यूरेटा क्लब से जोड़ा। सुआरेज ने पहले ही मैच में हैट्रिक लगाकर अपने क्लब 2-0 से पिछड़ रहे मैच में जीत दिला दी। इसी दौरान उनके पिता ने परिवार को छोड़ दिया और आर्थिक तंगी के कारण सुआरेज को फुटबॉल भी छोड़ना पड़ा। इन हालातों में सुआरेज गलत राह मुड़ गए और दारू के नशे में रहने लगे। 15 साल की उम्र में इन सब चीजों से जूझते हुए उनकी मुलाकात सोफिया से हुई। 13 साल की सोफिया को देखते ही सुआरेज को उनसे प्यार हो गया। उन्होंने कहा, '15 साल की उम्र में मुझे गर्लफेंड मिली जिसने मेरे दिमाग से सारे सवाल खत्म कर दिए। मुझे इस दौरान एहसास हुआ कि मेरे लिए फुटबॉल क्या है।'
इसके बाद सुआरेज के लिए केवल फुटबॉल और सोफिया ही अहमियत रखते थे। वह सोफिया के लिए सड़क पर पड़े पैसे उठाते थे औऱ उन्हें ट्रीट दिया करते थे। हालांकि एक बार फिर उनका दिल टूट गया जब सोफिया अपने परिवार के साथ बार्सिलोना चली गई। सुआरेज ने इसके बाद दिन-रात मेहनत की और लिवरपूल में शामिल हुए जिससे वह सोफिया के करीब आ सकते थे। सुआरेज इस दौरान कई विवादों में फंसे लेकिन सोफिया ने उनका साथ नहीं छोड़ा। जब सुआऱेज पर विरोधी खिलाड़ी को काटने के कारण 10 मैचों का बैन लगा तब भी वह उनके साथ रही। उन्होंने सुआरेज को संभाला और फिर से मैदान पर भेजने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने कभी पलटकर नहीं देखा। आज वह दुनिया के सबसे कामयाब क्लब में शामिल बार्सिलोना का हिस्सा हैं और उसकी रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। एक समय पर मेसी, नेमार और सुआरेज की तिकड़ी को तोड़ना विरोधियों के लिए असंभव हो जाता था।