नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मध्य प्रदेश के 22 बागी विधायकों की अयोग्यता पर मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष द्वारा निर्णय लेने की याचिका को इस संबंध में स्पीकर के बयान के लिए एक सप्ताह के बाद सूचीबद्ध किया जाए। इस संबंध में याचिका कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना ने दायर की थी। इस मामले में उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कोर्ट को जानकारी दी कि याचिका में मामले की सुनवाई टालने के लिए अर्जी लगाई गई है।  जब तन्खा ने अदालत को सूचित किया कि अयोग्य ठहराए जाने के अपने फैसले पर अध्यक्ष से प्रतिक्रिया के लिए मामला सूचीबद्ध किया गया है, तो कोर्ट ने पूछा कि उनकी ओर से कौन पेश हो रहा है? विधानसभा अध्यक्ष के लिए वकील पेश हुए और उन्होंने कहा कि उन्हें केवल कल ही याचिका की एक प्रति मिली है। इसके बाद उन्होंने मामले में विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिये जाने की मांग की। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस से बीजेपी में शामिल 22 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की याचिकाओं पर निर्णय नहीं लेने के कारण पर मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष से जवाब मांगा था। कोर्ट ने कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना द्वारा दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि विधानसभा अध्यक्ष ने अयोग्यता का फैसला करने के लिए 3 महीने की समयसीमा का उल्लंघन किया है। इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष की ओर से अभी जवाब दिया जाना बाकी है।