हैदराबाद । महिला बैडमिंटन स्टार पी वी सिंधु ने कहा है कि इस समय पूर्व भारतीय खिलाड़ियों को कोच के रुप में अवसर दिया जाना चाहिये। सिंधु का मानना है कि कोरोना महामारी के हालातों को देखते हुए अभी विदेशी कोचों की सेवाएं लेना संभव नहीं होगा और इन हालातों में पूर्व भारतीय खिलाड़ियों को कोच नियुक्त किया जाना चाहिये। सिंधु ने एक कार्यक्रम में कहा, ‘अगर महामारी बनी रहती है तो विदेशों से कोच लाना बेहद कठिन हो सकता है। हमारे देश में बहुत से अच्छे खिलाड़ी हैं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेले हैं, ऐसे में हम उनका कोच के रूप में अच्छा उपयोग कर सकते हैं।’ ओलिंपिक रजत विजेता सिंधु ऑनलाइन सत्र के दौरान भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के नव नियुक्त सहायक निदेशकों को संबोधित कर रही थीं। सिंधु ने कहा कि एक चैंपियन को तैयार करने में माता पिता, कोच और प्रशासकों की एक टीम मिलकर काम करती है। उन्होंने कहा, ‘प्रशासकों को प्रत्येक खिलाड़ी के अब तक के खेल करियर का पता होना चाहिए। भारतीय खेलों का भविष्य युवा खेल प्रशासकों के हाथों में ही रहता है।’ सिंधु ने कहा, ‘आपको साई के क्षेत्रीय केंद्रों का हर हाल में दौरा करना चाहिए तथा खिलाड़ियों के प्रदर्शन की जानकारी होनी चाहिये। आपको उनके माता पिता के संपर्क में भी रहना चाहिए। माता पिता की भागीदारी अहम होती है और आपको उनसे ‘फीडबैक’ लेना चाहिए। इस फीडबैक को ध्यान में रखना होगा।’
साथ ही कहा कि उम्र में धोखाधड़ी से बचने के लिए खिलाड़ियों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘आपको पता होना चाहिए कि साई की कोचिंग प्रणाली किस तरह से काम करती है और क्या खिलाड़ियों को प्रत्येक केंद्र पर सही भोजन और पोषक तत्व मिल रहे हैं।’ सिंधु ने कहा कि एक खिलाड़ी की सफलता में माता पिता का योगदान भी अहम होता है और उसे कम करके नहीं आंका जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘रियो ओलिंपिक से पहले हम अकैडमी में रहने के लिए चले गए थे। मेरी मां ने तब मेरे लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी थी। वहीं मेरे पिताजी ने दो साल का अवकाश ले लिया था।’ उन्होंने कहा, ‘मेरे लिए चुनौती 2015 में लगी चोट से उबरना था। इस कारण मैं अकैडमी में ही रहकर खेलती थी।’