करीब 60 हजार करोड़ रुपये के NPA बम पर बैठा हुआ है SBI! तिमाही नतीजों से खुलासा

बैंक ने खुद ही यह खुलासा किया है कि 2020-21 के मौजूदा वित्त वर्ष में उसका कर्ज मिलने में चूक और रीस्ट्रक्चरिंग का आंकड़ा मिलाकर 60,000 करोड़ रुपये का हो सकता है.  सितंबर तिमाही के एसबीआई के मुनाफे में करीब 52 फीसदी की जबरदस्त बढ़त हुई है. 

SBI का एनपीए बढ़ने की आशंका 

SBI के लोन चुकाने में चूक बढ़ीइस चूक के NPA बनने की आशंका हैबैंक का तिमाही मुनाफा बेहतर रहा है
देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में लोन को लौटाने में चूक या रीस्ट्रक्चरिंग का आंकड़ा करीब 60,000 करोड़ रुपये के तक पहुंच रहा है. यह चूक अगले वर्षों में एनपीए में बदल जाने की आशंका है. 

बैंक ने खुद ही यह खुलासा किया है कि 2020-21 के मौजूदा वित्त वर्ष में उसका कर्ज मिलने में चूक और रीस्ट्रक्चरिंग का आंकड़ा मिलाकर 60,000 करोड़ रुपये का हो सकता है. गौरतलब है कि स्टेट बैंक ने बुधवार को ही सितंबर तिमाही के नतीजों का ऐलान किया है. इसमें यह बताया गया है कि सितंबर तिमाही के एसबीआई के मुनाफे में करीब 52 फीसदी की जबरदस्त बढ़त हुई है. 

करीब 20 हजार करोड़ की रीस्ट्रक्चरिंग 

बैंक को कोविड-19 पैकेज के तहत करीब 6,495 करोड़ रुपये के लोन के लिए एकमुश्त तरीके से रीस्ट्रक्चरिंग करने के आवेदन मिले हैं. रीस्ट्रक्चरिंग का मतलब कर्ज चुकाने की शर्तों या अवधि में फेरबदल कराना है. करीब 2,500 करोड़ रुपये के रीटेल यानी छोटे लोन के लिए रीस्ट्रक्चरिंग के आवेदन मिले हैं. वास्तव में रिटेल लोन में रीस्ट्रक्चरिंग का आवेदन करने वालों में बड़ा हिस्सा MSME का है. इसके अलावा करीब 42 बड़े कॉरपोरेट ग्राहकों ने करीब 4,000 करोड़ रुपये के लोन के रीस्ट्रक्चरिंग के लिए आवेदन किया है.

यही नहीं, दिसंबर 2020 तक 13,000 करोड़ रुपये के लोन की रीस्ट्रक्चरिंग के आवेदन और आने की आशंका है. इस तरह कोविड-19 के तहत ही बैंक को करीब 19,495 करोड़ रुपये के लोन रीस्ट्रक्चरिंग के आवेदन मिल सकते हैं. एसबीआई के चेयरमैन दिनेश खारा ने कहा कि अतिरिक्त रीस्ट्रक्चरिंग का खाता काफी हद तक कॉरपोरेट से और कुछ हद तक एसएमई से आएगा. 


भारतीय रिजर्व बैंक ने बैकों और कॉरपोरेट जगत को दिसंबर 2020 तक का समय दिया है कि वे दो साल तक के लिए लोन रीस्ट्रक्चर करने के लिए आपसी डील कर लें. जो लोन रीस्ट्रक्चरिंग के तहत वर्गीकृत किए जाएंगे, उनको एनपीए नहीं माना जाएगा. लेकिन बैंक ऐसे लोन के लिए अपने बहीखाते में प्रोविजनिंग कर सकते हैं. 

करीब 40 हजार करोड़ के लोन चुकाने में चूक 

इसी तरह नतीजों के मुताबिक इस वित्त वर्ष 2020-21 की पहली छमाही में लोन मिलने में चूक करीब 6,393 करोड़ रुपये की हो सकती है. इसके अलावा बैंक का कहना है कि इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अतिरिक्त प्रोफार्मा स्लिपेज करीब 14,388 करोड़ रुपये के लोन चुकाने में चूक हुई है.

इसी तरह बैंक को लगता है कि दूसरी छमाही में भी करीब 20,000 करोड़ रुपये के लोन चुकाने में चूक हो सकती है. इसी तरह लोन चुकाने में कुल चूक करीब 40,781 करोड़ रुपये की होगी, यानी इतना लोन ईएमआई या अन्य तरीके से बैंक को इस साल में वापस नहीं मिलेगा.

पांच फीसदी से ज्यादा NPA 

बैंक को अपने बहीखाते में इसका 15 फीसदी का प्रोविजनिंग करना होगा जो करीब 9,000 करोड़ रुपये का होता है. इसके अलावा बैंक इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में ऐसी लोन चूक के लिए करीब 7,100 करोड़ रुपये की प्रोविजनिंग कर चुका है. 

बैंक का कुल लोन खाता 23.83 लाख करोड़ रुपये का है. इसमें से ​लोन चूक और रीस्ट्रक्चरिंग का हिस्सा 2.5 फीसदी है और सकल एनपीए करीब 5.28 फीसदी का है. यह लोन चूक एवं रीस्ट्रक्चरिंग भी यदि बाद में एनपीए बन जाता है तो कुल एनपीए और बढ़ जाएगा.