सिंगरौली । फ्लाय एश यानी राख से कई फायदे मिल सकते हैं और आमदनी भी बढ़ सकती है। पर्यावरण को चुनौती देने वाली राख से निपटने के लिए, पर्यावरण को बचाने और इसे आय का जरिया बनाने के लिए पर्यावरण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा अभूतपूर्व पहल करने जा रहे हैं, इसकी शुरूआत वे सिंगरौली से करेंगे। मध्यप्रदेश सरकार के पीडब्ल्यूडी और पर्यावरण विभाग के कैबीनेट मंत्री सज्जन सिंह वर्मा शनिवार 14 सितंबर को सिंगरौली में होंगे। वे यहां आयोजित राष्ट्रीय स्तर की  कार्यशाला में मौजूद होंगे। विंध्यनगर स्थित विंध्याचल सुपर ताप विद्युत गृह परिसर के आडीटोरियम में आयोजित इस कार्यशाला का विषय है- फ्लाय एश का पर्यावरणीय प्रबंधन: उपयोग एवं भावी संभावनाएं। कार्यशाला का शुभारंभ शनिवार को सुबह 9 बजे जबकि समापन शाम 5 बजे होगा। 
मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने बताया कि संयंत्रों से निकलने वाली फ्लाय एश का सौ प्रतिशत उपयोग किया जाना तय करने के लिए सरकार पहल कर रही है। लोक निर्माण विभाग फ्लाय एश का उपयोग कर पुल और फ्लाय ओवर निर्माण, भवन निर्माण, ईंट-ब्लाक्स निर्माण कर रहा है। लोगों की परेशानियों को दूर करने के लिए देश के ख्यात विशेषज्ञों से सुझाव लिए जाने हेतु कार्यशाला का आयोजन किया है। इस के लिए देश भर से वैज्ञानिक, पर्यावरण विद् और विषय विशेषज्ञ, एनजीटी और आईआईटी से प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। इसमें मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के डायरेक्टर एचके शर्मा, भारत शासन के फ्लाय एश यूनिट डीएसटी के पूर्व मिशन निदेशक डा विमल कुमार, सीएसआईआर के प्रिंसिपल साईटिस्ट श्री प्रशात, यूके गुरू, डा एस मुरली, थापर यूनिवर्सिटी पंजाब के पूर्व ईडी डा दिनेश गोयल सहित अन्य वैज्ञानिक व विषय विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। इसमें फ्लाय एश को लेकर तमाम विषयों पर वैज्ञानिक अपने विचार रखेंगे। वहीं इसके सड़क निर्माण, खदान क्षेत्र में इसके उपयोग, ईंट निर्माण, गहरे इलाकों के समतलीकरण और भूमि सुधार जैसे कार्यों में उपयोग आदि को लेकर चर्चा की जाएगी। तकनीकी सत्र भोजनावकाश के बाद दोपहर दो बजे से शुरू होगा, जिसके बाद व्याख्यान होंगे और वैचारिक आदान-प्रदान सत्र होगा।