नई दिल्ली । भारतीय रुपया अब पड़ोसी पाकिस्तानी रुपए से दोगुना मूल्यवान हो गया है। शुक्रवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 70 पर था जबकि पाकिस्तानी रुपया 150 के पार चला गया। वैसे तो पाकिस्तानी रुपया पिछले कुछ महीनों से लगातार दबाव झेल रहा है, लेकिन इस वर्ष मार्च तक भारतीय रुपये के मुकाबले उसकी कीमत आधी नहीं हुई थी।

अटकलों से बढ़ा संकट
इस सप्ताह पाकिस्तानी रुपया अपने निम्नतम स्तर पर आ गया। इससे कुछ दिनों पहले ही अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक कोष ने पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर का बेल आउट पैकेज देने पर सहमत हुआ था। आईएमएफ 1980 से अब तक पाकिस्तान को 12 बार राहत पैकेज दे चुका है और इस बार के वित्तीय संकट से उबारने के लिए उसे 13वां पैकेज देने का फैसला किया गया है।

एशिया की सबसे ज्यादा कमजोर पड़ी मुद्रा
बहरहाल, पाकिस्तानी रुपये का भाव पिछले एक साल में 20 फीसदी से ज्यादा घट चुका है और यह डॉलर के मुकाबले एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गई है। गौरतलब है कि कमजोर होती मुद्रा से देश में महंगाई को बढ़ावा मिलता है। अभी पाकिस्तान 8त्न की महंगाई दर का सामना कर रहा है। वहां बिजली के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल, गैस जैसे ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं।

सहमे हुए निवेशक
पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने राहत पैकेज के लिए आईएमएफ की कौन-कौन सी शर्तें मानी, इसकी अटकलें आग में घी डालने का काम कर रही हैं। निवेशक पाकिस्तान में डॉलर की अपर्याप्त आपूर्ति से सहमे हुए हैं। आईएमएफ ने बाजार निर्धारित विनिमय दर की बात कही थी, लेकिन वास्तविक शर्तों पर बात अब भी नहीं बनी है।

पाकिस्तान सरकार की कवायद
पाकिस्तानी सरकार ने गिरते रुपए को थामने के लिए एक समिति गठित की है। सरकार शायद पर्यटन के लिए विदेश जा रहे पाकिस्तानियों को सीमित मात्रा में डॉलर देने का फैसला ले सकती है। कहा जा रहा है कि यह रकम 10,000 डॉलर से घटाकर 3,000 डॉलर की जा सकती है। इस फैसले से पाकिस्तान के खजाने में एक साल में 2 अरब डॉलर ज्यादा बच पाएंगे।