भोपाल. हमीदिया अस्पताल (Hamidia Hospital) में रेमडेसिविर इंजेक्शन चोरी होने के मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती जा रही है वैसे कई खुलासे हो रहे हैं. सूत्रों के अनुसार क्राइम ब्रांच (Crime branch) के हाथ एक डायरी लगी है, जिसमें चोरी गए 863 इंजेक्शन का लेखा जोखा दर्ज है. इससे ऐसे संकेत मिलते हैं कि अस्पताल के अंदर ही डॉक्टर, स्टाफ ने इंजेक्शन्स की हेराफेरी की है.

हमीदिया अस्पताल से इंजेक्शन चोरी मामले में जांच जिस दिशा में बढ़ रही है उससे लगता है कि इसमें अंदर के ही लोगों का हाथ है. जांच के दौरान स्टोर से एक डायरी मिली है. उसमें चोरी गए 863 इंजेक्शन का पूरा ब्योरा है. सूत्रों ने यह भी बताया कि गायब हुए रेमडेसिविर इंजेक्शन डिमांड करने वाले डॉक्टर, स्टाफ, अन्य रसूखदरों को दिए गए. डायरी में इंजेक्शन की संख्या के आगे उसे लेने वालों की एंट्री भी दर्ज है. ये खुलासा होने के बाद अब स्टोर के स्टाफ सहित अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ अमानत में खयानत की धारा बढ़ाई जा रही हैं.

पूर्व अधीक्षक से लंबी पूछताछ
तत्कालीन अधीक्षक आईडी चौरसिया, आरती कैथल, तुलसीराम पाटनकर से पूछताछ में कई बड़े खुलासे हुए. लंबी पूछताछ के बाद चौरसिया को छोड़ दिया गया. क्राइम ब्रांच ने अभी तक 35 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए हैं.
मृतक मरीज़ों के बचे इंजेक्शन्स में भी घालमेल


पुलिस की जांच में उजागर हुआ है कि हमीदिया के डॉक्टर और स्टाफ ने कोविड सेंटर में पेशेंट्स को इंजेक्शन देने में भी बड़ी धांधली की है. स्टोर से कोविड सेंटर को दिए गए इंजेक्शन में जमकर हेराफेरी भी की गई. इलाज के दौरान जिन मरीज़ों की मौत हो गयी उनके बचे हुए इंजेक्शन्स में भी घालमेल किया गया.


चौरसिया ने वीडियो जारी कर दी सफाई...
हमीदिया के पूर्व अधीक्षक डॉक्टर आई डी चौरसिया ने वीडियो के जरिए अपना बयान जारी किया है. उन्होंने कहा मैंने खुद व्यक्तिगत और पारिवारिक कारण की वजह से अधीक्षक पद से हटने के लिए आग्रह किया था. पुलिस अपना काम कर रही है. क्राइम ब्रांच ने मुझे अधीक्षक होने के नाते बयान के लिए बुलाया था. मुझे ना पुलिस ने पकड़ा और न ही बैठाकर रखा.