रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला के मंदिर निर्माण की तैयारियां की जा रही हैं। इसी कड़ी में शनिवार को भारी भरकम कासागारनेड मशीन मंगवाई गयी। इसी मशीन से रामजन्मभूमि परिसर में मंदिर निर्माण के लिए प्रस्तावित स्थल पर सौ फिट तक पाइलिंग कर कंकरीट भरी जाएगी। यही कंकरीट चट्टान का स्वरुप लेगी और फिर इसी पर मूल मंदिर की नींव रखी जाएगी। इसी के चलते कार्यदाई संस्था एल एण्डटी की ओर से मशीन मंगवाई गयी है। जयपुर से चलकर यह मशीन कानपुर में प्रतीक्षारत थी। राम मंदिर का मानचित्र स्वीकृत हो जाने के बाद रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय की हरी झंडी मिलने के बाद मशीन को कानपुर से अयोध्या लाया गया। श्ुाक्रवार की मध्यरात्रि यहां पहुंची मशीन को रामजन्मभूमि परिसर में ले जाने के लिए कई प्रयास किए गये। फिर भी मशीन की लंबाई काफी अधिक होने के कारण उसे नहीं ले जाया जा सका। मालूम हो कि कासागारनेड नामक मशीन की ढुलाई करने वाले वाहन में 88 चक्के लगे हुए हैं। फिलहाल अब ट्रस्ट के निर्देश पर रामजन्मभूमि परिसर के मुख्य द्वार को तोड़कर चौड़ा किया जाएगा। इसके कारण वाहन मुख्य मार्ग पर किनारे पार्क करा दिया गया है।

विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर नींव की डिजाइन तैयार हो रही 
उधर सीबीआरआई व आईआईटी, चेन्नई के विशेषज्ञों की ओर से भेजी गयी रिपोर्ट के आधार पर नींव की डिजाइन तैयार हो रही है। इसके साथ ही ट्रस्ट की ओर से चेन्नई भेजी गयी गिट्टियों व मोरंग का परीक्षण कार्य भी पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा कौन से स्टैंडर्ड की सीमेन्ट का प्रयोग किया जाएगा, इस बबात भी विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट भेज दी है। विशेषज्ञों की इसी रिपोर्ट के बाद एलएण्डटी  मंदिर निर्माण की मुख्य तैयारी में जुट गया है। इस कार्य के लिए अलग-अलग एजेंसियों से श्रमिकों को भी हायर करने के लिए निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

परिसर में जर्जर मंदिरों का ध्वस्तीकरण जारी
रामजन्मभूमि परिसर में जर्जर मंदिरों व भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया जारी है। जन्मस्थान-सीता रसोई व बहराइच मंदिर के अतिरिक्त साक्षी गोपाल मंदिर के भवन को ध्वस्त किया जा चुका है और इसके मलबे से मुख्य मंदिर के पश्चिमी भाग के गड्ढे को पाटा जा रहा है। इसके अलावा मानस भवन, कोहबर भवन व रामखजाना समेत आनंद भवन को भी ढहाने की तैयारी की जा रही है।