सोरायसिस एक त्वचा संबंधी  बीमारी है, जिसे त्वचा  का अस्थमा भी कहा जाता है। इसमें त्वचा की कोशिकाएं  काफी तेजी से बढ़ते हैं। इसमें त्वचा  की ऊपरी परत पर पपड़ी बन जाती है और वह छिल जाती है। इससे त्वचा  में शुष्कता आ जाती है और सफेद धब्बे पड़ जाते हैं। खुजलाहट के कारण त्वचा लाल हो जाती है और उसमें घाव बन जाते हैं।
अक्सर सोरायसिस किसी भावनात्मक आघात या तनाव से होता है, हालांकि इसके और कारण भी हैं। प्राचीन विज्ञान आयुर्वेद के अनुसार, वात और कफ के असंतुलन के कारण सोरायसिस होता है।
सोरायसिस त्वचा  से जुड़ी एक ऑटोइम्यून डिसीज है, जो किसी भी उम्र में हो सकती है। इस बीमारी में त्वचा पर एक लाल रंग की मोटी परत बन जाती है, जो चकत्ते की तरह दिखती है। इन चकत्तों में खुजली के साथ दर्द और सूजन भी महसूस हो सकती है। आमतौर पर इसका असर कोहनी के बाहरी हिस्से और घुटने पर ज्यादा देखा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर यह रोग होता है।
जब भी शरीर पर लाल चकत्ते दिखें और खुजली भी हो रही है, तो इसे अनदेखा न करें। हो सकता है यह सोरायसिस का संकेत हो। कई लोग इसे इंफेक्शन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी कम होने के बजाय और बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति के लिए एलोपैथिक इलाज बहुत ज्यादा असरदार नहीं होते। लेकिन हल्के लक्षणों के लिए घरेलू उपचार बहुत फायदेमंद हैं। कारण एलॉपथी में कॉर्टिकोस्टेरॉइड देने से तत्काल आराम लग जाता हैं बाद में फिर से उभार होने लगता हैं .
बचाव के लिए ,पूरक आहार लें
पूरक आहार सोरायसिस के लक्षणों को कम पूरक आहार सोरायसिस के लक्षणों को कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं।  विटामिन डी, दूध, एलोवेरा, अंगूर जैसे पूरक आहार लेने से सोरायसिस को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
त्वचा को सूखने  से रोकें
सोरायसिस से बचने के लिए जरूरी है कि अपनी त्वचा को शुष्क न होने दें। कोशिश करें, कि घर या ऑफिस में ह्यमिडिफायर का उपयोग करें। संवेदनशील त्वचा वालों के लिए मॉइस्चराइजर त्वचा को कोमल रखने का बढिय़ा उपाय है।
तेज सुगंध से बचें
बेशक सुगंधित साबुन और परफ्यूम आपको अच्छा फील कराते हों, लेकिन इनमें मौजूद केमिकल और डाई आपकी त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं। इनकी तेज सुगंध सोरायसिस के लक्षणों को भड़काने का काम करती है। संवेदनशील त्वचा वाले लोग ऐसे साबुन और परफ्यूम इस्तेमाल करने से बचें।
शरीर को पानी में भिगोएं
वैसे तो गर्म पानी आपकी त्वचा में खुजली पैदा कर सकता है, लेकिन गुनुगने पानी में सेंधा नमक, दूध या जैतून का तेल डालकर नहाने से सोरायसिस में होने वाली खुजली को कम करना काफी आसान हो जाता है।
शराब के सेवन से बचें
सोरायसिस से बचाव के लिए शराब का सेवन न करना बेहतर इलाज है। जो लोग हर सप्ताह पांच नॉनलाइट बीयर पीते हैं, उनमें सोरायसिस बढने की संभावना दोगुना हो जाती है। इसलिए  इस समस्या से ग्रसित लोगों को शराब का सेवन  न करे
हल्दी का उपयोग करें
त्वचा से जुड़े किसी भी रोग के लिए हल्दी असरदार है। यह बीमारी से होने वाली सूजन को कम करती है। इसे भोजन में डालकर या फिर टैबलेट या सप्लीमेंट रूप में लिया जा सकता है। सोरायसिस होने की स्थिति में एफडीए ने इसकी खुराक प्रतिदिन 1.5 से 3.0 ग्राम तक लेने का सुझाव दिया है।
स्वास्थवर्धक भोजन करें
सोरायसिस से बचने के लिए अच्छी डाइट बेहद जरूरी है। कोल्ड वॉटर  नट्स और ओमेगा-3 फैटी एसिड में सूजन को कम करने की क्षमता होती है। इस स्थिति में त्वचा पर ऑलिव ऑयल लगाना यानि जैतून का तेल लाभकारी है।
तनाव कम करें
सोरायसिस जैसी कोई भी समस्या तनाव पैदा कर इनके लक्षणों की स्थिति बदतर और भी बदतर कर सकती है। इसलिए जितना संभव हो तनाव कम लें। इसके लिए योगा, ध्यान जैसे अभ्यास बहुत कारगार साबित होंगे।
लाइट थैरेपी
सिरोयासिस से राहत के लिए लाइट थैरेपी बेस्ट है। इस थैरेपी का इस्तेमाल मरीज को रोग से जल्दी छुटकारा दिलाने के लिए किया जाता है। इसमें डॉक्टर मरीज की त्वचा पर पैराबैंगनी किरणें डालते हैं। यह लाइट स्किन सेल्स की वृद्धि को धीमा करती है। ध्यान रखें, लाइट थैरेपी हमेशा एक डॉक्टर की देखरेख में ही करानी चाहिए।
धुम्रपान से बचें
अगर आप धुम्रपान के आदी हैं, तो यह समय है जब आपको अपनी इस आदत को छोड़ देना चाहिए। । स्मोकिंग और तंबाकू के सेवन से सोरायसिस का खतरा बढ़ सकता है। यदि आप पहले से ही इस बीमारी से ग्रसित हैं, तो यह आपके लक्षणों को और भी गंभीर बना सकता है।
प्राकृतिक इलाज
छाछ
आयुर्वेद तक्रधारा के इलाज के अनुसार, सोरायसिस की बीमारी में शुद्ध किए हुए औषधीय छाछ का प्रयोग किया जाता है। इससे स्किन और बाल हेल्दी रहते हैं।
नीम
नीम के पत्ते सोरायसिस के इलाज में काफी कारगर होते हैं। नीम का तेल पोषक तत्वों से भरपूर है और उसका उपयोग कई प्रकार के लोशन, क्रीम, साबुन व प्रसाधन सामग्रियों में होता है। यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जिन्हें खुजली की बीमारी यानी एक्जिमा है। साथ ही इससे सोरायसिस और कील-मुंहासों के इलाज में भी मदद मिलती है। इसे खरोचों व छोटे घावों पर भी लगाया जा सकता है। शायद यही कारण है कि हर प्रकार की दवाई वाले लोशन में नीम का तेल रहता ही है। नीम का तेल त्वचा की शुष्कता और खुजलाहट दूर करता है।
विरेचन
आयुर्वेद के विशेषज्ञ विरेचन  देते हैं जिससे शरीर से सारे विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं।
विषैले तत्व पैदा करने वाले खाने से बचाव
आयुर्वेद के अनुसार, कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिनका खाने के दौरान गलत कॉम्बिनेशन शरीर में विषैले तत्व पैदा कर सकता है। जैसे कि मिल्कशेक और दही कभी एक साथ न खाएं।
सन के बीज
सन के बीज में ऐसे पदार्थ होते हैं जो शरीर में सूजन कम करते हैं जैसे ओमेगा 3 फैटी ऐसिड्स। साथ ही इनमें ऐंटीऑक्सिडेंट्स भी होते हैं, जो हॉर्मोन के सिक्रीशन ( स्राव) में बैलेंस बनाए रखते हैं। सन के कच्चे या भुने हुए बीज खाने से स्किन साफ रहती है।
6- योग
चूंकि सोरायसिस भावनात्मक आघात के कारण होता है इसलिए प्राणायाम और सुदर्शन क्रिया, जोकि एक लयबद्ध सांस लेने की प्रक्रिया है, बहुत लाभदायक होती है। सुदर्शन क्रिया शरीर से भावनाओं के स्तर पर मौजूद विषैले तत्वों और नकारात्मक भावनाओं को निकाल देती है।
1. 3 बार ॐ का उच्चारण करें
2. कपालभाति - 20 बार, चक्र ( यदि आपका ब्लड प्रैशर बढ़ा रहता है, हृदय संबंधित रोग हैं या फिर चक्कर आते हैं तो धीमी गति से ही करें)
3. भस्त्रिका - 20 बार, 3 चक्र ( यदि आपका ब्लड प्रैशर बढ़ा रहता है, हृदय संबंधित रोग हैं या फिर चक्कर आते हैं तो धीमी गति से ही करें)
4. नाड़ी शोधन - 9 से 12 चक्र, धीमी और गहरी सांसें लें
5. भ्रामरी - 5 बार
6. इसके साथ साथ, अधिक मात्रा में पानी पिएं, योग निद्रा करें, चुस्त रहें और संतुलित आहार लें।
7. अपनी पसंद का कम से कम एक ध्यान प्रतिदिन करें।
यह रोग असाध्य  वर्ग में आता हैं ,इसमें लम्बे समय तक इलाज़ की जरुरत पड़ती हैं जिससे मानसिक प्रभाव मरीज़ के ऊपर पड़ता हैं .इसमें बचाव के साथ इलाज़ भी जरुरी हैं .
आरोग्यवर्धिनी + किशोर गुग्गलु == दो दो गोली दोनों सुबह शाम पानी से
सारिवाद्यारिस्ट +कुमारी आसव == चार चार चम्मच सुबह शाम पानी से
(वयस्कों के लिए )
वाकुचि तेल स्थानीय प्रयोगार्थ
नमक तेल खटाइ मिर्च मसाले कम ,साबुन निरमा का उपयोग बंद ,बेसन का उबटन लाभदायक
जो स्थान संपर्क में रहता हैं वह किसी सिंथेटिक कपडे से दूर रहे या तलवे को आरामदायक हो और नुकसानदेह का उपयोग  न करे .क्योकि एलर्जिक सम्पर्क भी परेशान करता हैं .
जरुरत पड़ने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श जरूर ले .