प्रयागराज. तीर्थ राज प्रयाग में गंगा दशहरा (Ganga Dushera) यानि गंगा के धरती पर अवतरण का पावन पर्व बड़े ही श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है. लॉक डाउन (Lockdown 5.0) के पांचवें चरण की शुरुआत के साथ ही गंगा दशहरा के पर्व पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी पर फिर से रौनक लौट आई है. संगम (Sangam) के घाट जनता कर्फ्यू के दिन 22 मार्च से ही सूने पडे़ हुए थे लेकिन गंगा दशहरा के पर्व पर सुबह से ही संगम में श्रद्धालुओं के आने का क्रम शुरू हो गया है. गंगा के घाटों पर तीर्थ पुरोहितों के सूने पड़े तखत फिर से सज गए हैं और संगम के घाट भी श्रद्धालुओं से पूरी तरह से गुलजार नजर आ रहे हैं. दो माह से ज्यादा समय से गंगा के तट पर दुकानें सजाने वाले पटरी दुकानदारों की दुकानें भी अब सज गई हैं. गंगा दशहरा के मौके पर श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं.

 

गंगा में किया दीपदान
इस मौके पर श्रद्धालु गंगा स्नान के साथ ही गंगा में दीपदान कर मां गंगा की पूजा अर्चना कर रहे हैं. कोरोना लॉक डाउन के बीच गंगा स्नान करने आ रहे श्रद्धालु कोरोना से देश और दुनिया मुक्त हो इसको लेकर भी मां गंगा से प्रार्थना कर रहे हैं. गंगा दशहरा के मौके पर दीपदान और दान पुण्य का विशेष महत्व है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा में दस डुबकी लगाने से दस तरह के पापों से मुक्ति मिलती है और मां गंगा की आराधना से सभी मनोकामनायें भी पूरी होती हैं.

 

कोरोना का खौप भी आ रहा है नजर
इस वर्ष गंगा दशहरा के पर्व पर लोगों में कोरोना का खौफ भी साफ तौर पर नजर आ रहा है. लोग संगम पर भी कोरोना की गाइड लाइन के तहत सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते नजर आ रहे हैं. इसके साथ ही हर साल गंगा दशहरा पर होने वाले भंडारे और भजन संध्या के कार्यक्रमों को भी फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. हांलाकि सायंकाल गंगा घाटों के साथ ही विश्व प्रसिद्ध संगम तट पर तीर्थ पुरोहितों की ओर से दूध से मां गंगा का अभिषेक और महागंगा आरती आयोजित की गई है.

 

संत और महात्माओं ने भी लगाई डुबकियां
वहीं गंगा दशहरा के पावन पर्व पर संत महात्माओं ने भी संगम में आस्था डुबकी लगाई है. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी और महामंत्री हरि गिरि जी के साथ साधु संतों ने गंगा स्नान किया है. इस मौके पर साधु-संतों ने कोरोना वायरस से देश और दुनिया को मुक्त कराने के लिए मां गंगा से प्रार्थना की है. गंगा दशहरा यानी गंगा के अवतरण के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा में डुबकी लगाने और दान पुण्य करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. गंगा स्नान करने वालों में जूना अखाड़े के अध्यक्ष प्रेम गिरि महाराज, महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव यमुना गिरी जी महाराज भी शामिल रहे.