आयोग ने कहा - डीजीपी एवं एसपी बालाघाट एक माह में दें जवाब

बालाघाट जिले में चोरी रोकने में नाकाम पुलिस अब गरीबों पर पट्टे बरसाकर उन्हें जबरदस्ती चोरी का गुनाह कबूल करवाने पर तुली है, ताकि चोरियों से सवालों से घिरी पुलिस अपना बचाव कर सके। पुलिस आम लोगों के घर में हुई चोरियों को लेकर उतना गंभीर नजर नही आती है लेकिन गत दिनों वारासिवनी के किसी राजनीतिक रसूख वाले के घर में हुई लाखों रूपये की चोरी में दबाव झेल रही पुलिस ने चोरी को खुलवाने उन गरीब परिवारों को अपनी वर्दी का रौब दिखाकर उनकी निर्ममता से इतनी पिटाई की कि जो दो जून की रोजी-रोटी के लिए मेहनत मजदूरी कर अपना पेट पालते हैं।
बालाघाट जिले के वारासिवनी नगर में जसवंत पटले के घर हुई चोरी का उनके घर के पास रहने वाले गरीब परिवारों पर पुलिसवालों का सितम टूट पडा और संदेह के आधार पर पुलिस ने लगभग आधा दर्जन से ज्याादा पुरूषों को उठाकर उनकी इतनी बेरहमी से मारपीट की कि उनमें से कोई चलने में असमर्थ हो गया है, तो कोई पीठ के बल सो नही पा रहा है। पुलिस की बर्बरता से की गई पिटाई की पीडितों के शरीर में जख्मों के निशान स्वयं इस बात की गवाही का सबूत हैं। पुलिस की इस तरह संदेह के आधार पर पिटाई से पीडित गरीब परिवारों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर पुलिस की पिटाई से काम नहीं कर पाने की हालत से परिवार का जीविकोपार्जन करने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए पुलिस विभाग की ओर से आर्थिक सहायता दिलाने और बर्बरतापूर्वक पिटाई करने के मामले में दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्यवाही करने की मांग की है।
मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री नरेन्द्र कुमार जैन ने पुलिस महानिदेशक, मध्यप्रदेश तथा पुलिस अधीक्षक, बालाघाट से एक माह में तथ्यात्मक जवाब मांगा है।