जयपुर । बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के छह विधायकों के कांग्रेस में विलय के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई 13 अगस्त तक टल गई है। जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल ने कहा कि अब अगली सुनवाई 13 तारीख को होगी। भाजपा विधायक मदन दिलावर व बसपा महासचिव सतीश मिश्रा की ओर से दायर याचका की सुनवाई पर मंगलवार को सुनवाई पूरी नहीं हो पाई। याचिका में दलील है कि जब तक कोर्ट का आखिरी फैसला नहीं आता, तब तक बसपा विधायकों को विधानसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं होने दिया जाए। दिलावर ने सुप्रीम कोर्ट में भी अपील कर रखी है। सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई 13 अगस्त तक टल गई।

दिलावर की अपील है कि बसपा विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने की मंजूरी के लिए स्पीकर ने 18 सितंबर 2019 को जो आदेश दिया था, उस पर रोक लगाई जाए। खुद बसपा ने भी इस मामले को चुनौती दे रखी है। उसकी अपील है कि अर्जी हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर की जाए। सभी 6 विधायकों को विधानसभा के फ्लोर टेस्ट में किसी भी पार्टी के पक्ष में वोटिंग से भी रोका जाए। सोमवार को सुनवाई के दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविद सिंह डोटासरा व मुख्य सचेतक महेश जोशी की ओर से उन्हे पक्षकार बनाने को लेकर गुहार लगाई गई, लेकिन हाईकोर्ट ने मानने से इनकार कर दिया।

कांग्रेस की ओर से वकील वरूण चौपड़ा और शास्वत पुरोहित के जरिए हाईकोर्ट में पेश किए गए प्रार्थना पत्र में कहा गया कि राज्य विधानसभा अध्यक्ष ने 18 सितंबर, 2019 को विलय को मंजूरी दी है। उधर, वकील हेमंत नाहटा की तरफ से दायर याचिका में इन विधायकों को विधानसभा परिसर में प्रवेश नहीं देने का आग्रह किया गया था, जिसे मंजूर कर दिया गया।

इस बीच, बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय में मामले हाईकोर्ट में एक और याचिका दायर हुई है। एडवोकेट हेमंत नाहटा की तरफ से दायर याचिका में इन विधायकों को विधानसभा परिसर में प्रवेश देने पर ही रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में विलय को रद करने और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा दी गई मंजूरी के आदेश को निरस्त करने के साथ ही विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है।