नई दिल्ली । कोविड-19 के संक्रमण के चलते लोग ट्रेनों में सफर करने में कतरा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि राजधानी श्रेणी की गाडिय़ां खाली जा रही हैं। ऐसे ही हालात अन्य ट्रेनों के भी हैं। इनमें औसतन 30 से 35 फीसदी यात्री ही सफर कर रहे हैं। फिलहाल रेलवे को 100 रुपए कमाने के लिए 360 रुपए तक औसतन खर्च करना पड़ रहा है। मई के तीसरे सप्ताह से राजधानी श्रेणी की 30 व उसके बाद 200 स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया। उसके बाद से लेकर अब तक के हालात ट्रेनों में यात्रियों की संख्या के हिसाब से खासे चिंताजनक हैं। चेन्नई, सिकंदराबाद राजधानी एक्सप्रेस में तो दिल्ली से वापसी के वक्त 20 फीसदी यात्री भी नहीं मिल रहे हैं। जबकि दिल्ली जाते वक्त इनका प्रतिशत औसतन 30 तक पहुंचता है।
भोपाल एक्सप्रेस व संपर्क क्रांति की स्थिति बेहतर
हबीबगंज से शुरू होने वाली भोपाल एक्सप्रेस व यशवंतपुर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के हालात अन्य ट्रेनों के मुकाबले ठीक हैं। इनमें यात्रियों का प्रतिशत 50 से 55 तक पहुंच रहा है। ऐसे ही हालात कुशीनगर, पुष्पक, कामायनी के भी हैं, जिनमें मुंबई से उत्तर प्रदेश तरफ की यात्रा के दौरान 40 से 45 फीसदी तक यात्री मिल रहे हैं। इसका आशय यह है कि मुंबई से उत्तर भारत की तरफ जाने वाले यात्री अब भी ट्रेनों से सफर कर रहे हैं। इस वजह से भोपाल एक्सप्रेस को भी दिल्ली तरफ जाने वाले यात्री, लौटने वालों के मुकाबले ज्यादा मिल रहे हैं।