मुंबई से अहमदाबाद के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना का काम अगले कुछ महीने में शुरू हो सकता है। इसके लिए पहली बार सिविल निर्माण को लेकर प्रगति देखी जा रही है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (एनएचएसआरसी) ने मुंबई-अहमदाबाद के 508 किमी हाई स्पीड रेल परियोजना के सबसे बड़े 47 प्रतिशत हिस्से के वापी-बिलिमोरा-सूरत और वडोदरा के बीच 237 किमी बुलेट रेल कॉरिडोर निर्माण कार्य को लेकर टेक्निकल बिड खोल दी है, जिसमें तीन बड़ी भारतीय कंपनियां सामने आई हैं।

इसमें दो कंपनियां जॉइंट कंसोर्टियम में होंगी। बुलेट ट्रेन के परिचालन को साकार करने को लेकर यह अब तक का सबसे बड़ा कदम है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि अब हाई स्पीड रेल परियोजना जल्द ही पटरी पर आने वाली है। खास बात यह है कि टेक्निकल बिड में विदेशी कंपनी नहीं होने से भारतीय बुलेट ट्रेन काफी हद तक आत्मनिर्भर भारत की तर्ज पर तैयार होगा। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है चूंकि रेक भारत में नहीं बनता अन्यथा उसको भी देश में भी बनाया जाता।

प्रोग्रेस: टेक्निकल बिड में शामिल तीनों भारतीय कंपनियों का मूल्यांकन होने के बाद जारी होगा टेंडर

एनएचएसआरसी के अनुसार 47 प्रतिशत हिस्से में 237 किमी बुलेट कॉरिडोर के लिए तीन कंपनियां सामने आई हैं। यह कंपनियां बुलेट रेल डिजाइन, डिजाइन समीक्षा, सिस्टम एकीकरण, तमाम तकनीकी खरीद में सहयोग, कंस्ट्रक्शन सुपरविजन (वैधानिक दायित्वों की निगरानी सहित), परियोजना प्रबंधन सेवाएं, अनुबंध प्रशासन और इंटरफेस प्रबंधन का काम करेंगी, जिसमें बुलेट रेल लाइन के निर्माण का परीक्षण और परियोजना के शुरुआती निर्माण में सहायता शामिल है। अब टेक्निकल बिड खोलने के बाद सभी मापदंडों पर इन कंपनियों की जांच की जा रही है। अगर उस पर ये खरी उतरती हैं तो इसके बाद फाइनेंशियल बिड खोला जाएगा। इसके खुलते ही इन कंपनियों का मूल्यांकन होगा, जिसमें लगभग डेढ़ से दो महीने का वक्त लगेगा और फिर तमाम शर्तों को पूरा करने वाली कंपनी को टेंडर सौंप दिया जाएगा।

बुलेट ट्रेन परियोजना के सबसे पहले 47 प्रतिशत हिस्से पर काम किया जाएगा। यह पूरा हिस्‍सा गुजरात राज्य में है। क्योंकि गुजरात में बुलेट परियोजना के लिए कुल 83 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हो गया है। वापी, बिलिमोरा, सूरत और भरूच के बीच 24 छोटी बड़ी नदी जिस पर ब्रिज का निर्माण और 30 रोड ओवर ब्रिज बनेगा। 237 किमी रुट पर कुल चार स्टेशन बनेंगे। इसके अलावा अहमदाबाद से मुंबई के बीच 508 किमी रुट में कुल 8 मेंटेनेंस डिपो बनेंगे। जहां बुलेट ट्रेनों का प्राथमिक निरीक्षण होगा, जबकि अब 3 बड़े रोलिंग स्टॉक मेंटेनेंस यार्ड डिपो भी बनाया जाएगा जहां बुलेट ट्रेन के प्रत्येक रेक की एक पार्ट मरम्मत होगी। यह यार्ड बड़े आकार में बनेंगे। इसमें से एक यार्ड सूरत में बनेगा, जहां बुलेट ट्रेन के प्रत्येक रोलिंग पार्ट की मरम्मत की जाएगी।

237 किमी रूट पर निर्माण कार्य से 90 हजार लोगों को रोजगार
बुलेट ट्रेन परियोजना के इस 47 प्रतिशत हिस्से के निर्माण में कुल 90,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। न केवल रोजगार बाजार बल्कि उत्पादन और विनिर्माण बाजार को भी परियोजना के साथ हासिल करने की उम्मीद है। अनुमान है कि निर्माण में 75 लाख मीट्रिक टन सीमेंट, 21 लाख मीट्रिक टन स्टील, और 1.4 लाख मीट्रिक टन संरचनात्मक इस्पात का उपयोग किया जाएगा और इन सभी का उत्पादन भारत में किया जाएगा। इसके अलावा, बड़ी निर्माण मशीनरी ये सभी भारतीय होंगी।

सिविल वर्क जल्द शुरू होने की संभावना: एनएचएसआरसीएल

बुलेट ट्रेन परियोजना के पहले 47 प्रतिशत हिस्से में 237 किमी मार्ग के निर्माण के लिए तीन बड़ी भारतीय कंपनियां सामने आ गई है। अब इनका मूल्यांकन होगा उसके आधार पर फाइनेंशियल बिड खोली जाएगी और इसके आधार पर किसी एक को काम सौंप दिया जाएगा। वापी-बिलिमोरा-सूरत-वडोदरा के बीच यह काम होगा। सिविल वर्क जल्दी ही शुरू होने की संभावना है, क्योंकि गुजरात में 83 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हो गया है।