नई दिल्ली । सरकार डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर (डीएफसी) बनने के बाद मालगाड़ी चलाने के लिए प्राइवेट कंपनियों को शामिल करेंगी। अभी देश में केवल भारतीय रेलवे ही मालगाड़ी चलाती है। गौरतलब है ‎कि सरकार ने 2023 तक प्राइवेट यात्री ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। प्राइवेट यात्री ट्रेन चलाने के लिए 16 कंपनियों ने रुचि दिखाई है। सरकार रेलवे ट्रैफिक को कम करने और सामान की सुगम डिलीवरी के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बना रही है। 80 हजार करोड़ से ज्यादा की लागत से डीएफसी के दो कॉरिडोर पहले चरण में बन रहे हैं। वेस्टर्न कॉरिडोर का 350 किलोमीटर का हिस्सा रेलवे ने तैयार कर लिया है और इस ट्रायल के बाद वेस्टर्न कॉरिडोर के हिस्से में माल की आवाजाही जल्द ही शुरू होगी। वेस्टर्न कॉरिडोर नोएडा के दादरी से शुरू होकर मुंबई की जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट तक बन रहा है। दूसरे चरण में 6 नए कॉरिडोर बनने हैं। यानी देश के चारों हिस्सों को डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ा जाना है।
कोरोना काल में मालगाड़ियों की रफ्तार दोगुनी हो गई है। 27 जुलाई 2020 को मालगाड़ी की औसत गति 46.16 किमी प्रति घंटे थी, जो पिछले साल की इसी तारीख (22.52 किमी प्रति घंटे) की तुलना में दोगुनी है। रेलवे की मालगाड़ी की औसतन रफ्तार 25 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है लेकिन कोरोना काल में यात्री ट्रेनों के बंद होने से मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ गई है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा गुड्स गाड़ियों की जो रफ्तार है वह 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी तेजी से माल की ढुलाई होगी। दूसरा फायदा यह होगा कि कमिटमेंट के साथ रेलवे व्यापारियों का माल समय पर डिलीवर कर सकेगा। तीसरा बड़ा फायदा यह होगा कि नॉर्मल ट्रैक पर जो अभी लोड बहुत ज्यादा है। गुड्स ट्रेन हटने से नॉरमल ट्रैक पर लोड कम होगा और उस पर पैसेंजर गाड़ियां समय से अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। रेलवे के मुताबिक कोरोना काल में माल ढुलाई में भी इजाफा हुआ है। 27 जुलाई 2020 को कुल माल ढुलाई 3.13 मिलियन टन था जो पिछले वर्ष की समान तारीख से अधिक है। 27 जुलाई 2020 को कुल 1039 रेक माल ढुलाई किए गए जिसमें 76 रेक खाद्यान्न, 67 रेक खाद, 49 रेक स्टील, 113 रेक सीमेंट, 113 रेक लौह अयस्क और 363 रेक कोयला शामिल हैं।