भोपाल । प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है। जिसमें जहां एक ओर नए चेहरों को जगह दी गई है, वहीं दूसरे ओर वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व मंत्रियों को बाहर रखा गया है। ऐसे में अभी तक किसी भी विधायक एवं नेता ने मंत्रिमंडल को लेकर खुलकर अपना विरोध दर्ज नहीं कराया और न ही फिलहाल किसी ने बगावती तेबर दिखाए हैं। भाजपा मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बनाई गई रणनीति में सफल रही है, वहीं कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है।
पिछले तीन महीने से टल रहे मंत्रिमंडल विस्तार पर कांग्रेस की नजर थी। कांग्रेस को उम्मीद थी कि पूर्व विधायकों को मंत्री बनाने और भाजपा के वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करने पर पार्टी में विरोध के स्वर उठेंगे, लेकिन शिवराज कैबिनेट में 28 नए मंत्रियों ने शपथ ले ली है। अभी तक न तो किसी विधायक ने अपना मुंह खोला है और न ही किसी ने मंत्रिमंडल पर सवाल उठाए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने जरूरत मप्र भाजपा को पत्र लिखकर कहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में उनकी सलाह को दरकिनार किय गया है। खास बात यह है कि मप्र भाजपा में टिकट वितरण से लेकर मंत्रियों के चयन में उमा की सलाह को लंबे समय से तवज्जो नहीं मिल रही थी। देवास में गायत्रीदेवी राजे को समर्थक ने नारेबाजी की। वहीं इंदौर में विधायक रमेश मेंदोला को मंत्री नहीं बनाने से नाराज समर्थकों ने विरोध किया था। खास बात यह है कि भाजपा के किसी भी नेता ने अभी तक मुंह नहीं खोला है।

रणनीति में सफल रही भाजपा
34 सदस्यीय शिवराज कैबिनेट में अजा-अजजा वर्ग को चार-चार मंत्री मिले हैं। जबकि ओबीसी के आठ मंत्री बने हैं। वहीं ठाकुर, ब्राह्मण एवं अन्य वर्ग के 17 मंत्री बने हैं। जिनमें से 11 मंत्री क्षत्रिय हैं। जबकि सिर्फ तीन मंत्री ब्राह्मण वर्ग से हैं। भाजपा मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बनाई गई अपनी रणनीति में सफल रही है।

कांग्रेस को झटका
कांग्रेस को उम्मीद थी कि भाजपा में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विद्रोह की स्थिति बनेगी। ऐेसे में कुछ नेता एवं विधायक बगावत भी कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। हालांकि कांग्रेस को अभी भी भाजपा में विद्रोह और बगावत होने का इंतजार है।