भोपाल. आत्मनिर्भर भारत योजना (Aatm Nirbhar Yojana) की तर्ज पर आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश बनाने पर काम कर रही शिवराज सरकार (Shivraj Government) ने रोडमैप बनाने का काम शुरू कर दिया है. रोडमैप बनाने के लिए 4 दिनों का वेबिनार हो रहा है. इसके पहले दिन जहां पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु समेत कई विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए, वहीं दूसरे दिन राज्यसभा सांसद विनय सहस्रबुद्धे समेत कई एक्सपर्ट ने आत्मनिर्भर MP के लिए सुझाव दिए. पहले दिन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की चर्चा हुई तो दूसरे दिन सुशासन पर सुझाव दिए गए.

वेबिनार के आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) ने कहा कि प्रदेश को विकास की ऊंचाइयों पर ले जाने का कार्य अकेले सरकार नहीं कर सकती. इसके लिए सभी का सहयोग आवश्यक है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को मूर्त रूप देने का मध्य प्रदेश ने बीड़ा उठाया है. इसके लिए आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश का रोडमैप तैयार किया जा रहा है. विशेषज्ञों के सुझाव के आधार पर आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश की कार्ययोजना तैयार की जाएगी. उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के लिए सरकार ने 3 साल का लक्ष्य तय किया है.

वेबिनार में पहले दिन मिले प्रमुख सुझाव

 'चंबल प्रोग्रेस-वे' तथा 'नर्मदा एक्सप्रेस-वे' को जल्द पूर्ण करने के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए पोर्टल विकसित किया जाएगा.

 उद्योग तथा व्यापार से संबंधित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए हाई पावर कमेटी गठित की जाए.

 मध्यप्रदेश को मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब बनाया जाए.

 सभी शहरी बायपास तथा रिंग रोड स्ववित्त पोषित परियोजना के रूप में लिए जाएं.

 परिवहन से संबंधित कर प्रणाली को सरल, स्पष्ट व सुविधाजनक बनाया जाएगा.

 ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क से कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए.

 ग्रामीण, ट्राइबल एरिया टूरिज्म एवं फिल्म टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाए.

 नागरिक सुविधाओं की सरल व समय-सीमा में डिलेवरी के लिए ई-गवर्नेंस का विस्तार किया जाएगा.

 सभी नागरिक सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाए.

 फल तथा सब्जियों के परिवहन के लिए व्यवहारिक लॉजिस्टिक समाधान दिए जाएं, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो.

 2024 तक प्रदेश कर हर घर नल-जल से जुड़े.

 कौशल विकास के लिए 50 हजार प्लम्बर, इलेक्ट्रिशियन, मैसन आदि के प्रशिक्षण की व्यवस्था.

 प्रदेश की 225 सिंचाई परियोजनाएं वर्ष 2023 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य. वर्ष 2026 तक हमारी सिंचाई क्षमता को 75 लाख हेक्टेयर तक ले जाने की योजना.

 प्रदेश विद्युत आपूर्ति और सौर ऊर्जा उत्पादन में देश में अग्रणी बने.

 शहरी क्षेत्रों में तीन लाख EWS आवास तैयार किए जाने की योजना.

 सभी शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन और इसकी रीसाईकिलिंग का लक्ष्य.

 नगरीय क्षेत्रों में ई-व्हीकल चार्जिंग के लिए अधोसंरचना निर्माण की योजना.

 प्रदेश में क्लीन एवं ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा.

 इंदौर और भोपाल में 'प्राइयोरिटी कॉरीडोर' निर्माण.

वेबिनार में दूसरे दिन मिले सुझाव

 राज्य शासन 'ईज ऑफ लाईफ' की अवधारणा का क्रियान्वयन करें.

 जनसामान्य को मूलभूत सुविधाएं घर बैठे मिल सके, इसके लिए डिजिटल सुविधा का विस्तार किया जाए.

"फेसलैस तकनीक" के माध्यम से व्यक्ति की शासकीय कार्यालयों में भौतिक उपस्थिति के‍ बिना ही उसके कार्य हो सकें.

 विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत प्रतिभावान युवाओं को शासकीय व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में कार्य हो.

 शासन के सभी विभागों की जानकारियों को 'सिंगल डाटाबेस' पर उपलब्ध कराया जाए.

 ई-ऑफिस व्यवस्था को प्रोत्साहित किया जाए.

 प्रदेश में "आऊटसोर्सिंग कार्पोरेशन" बनाया जाए, जो सभी विभागों के लिए आऊटसोर्सिंग का काम करें

"वर्क फ्रॉम होम" को बढ़ावा दिया जाए.

 जिला स्तर पर सभी विभाग "डैशबोर्ड" विकसित करें, जिससे कलेक्टर द्वारा ऑनलाइन मॉनीटरिंग हो सके.

 CM हेल्पलाईन को विस्तार देकर "सी.एम. सिटीजन केयर पोर्टल" प्रारंभ किया जाए.

 राजस्व, कृषि, सिंचाई आदि में ड्रोन तकनीक का उपयोग.

 योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन का परीक्षण "आउट कम इंडीकेटर" के आधार पर किया जाए.

 कर्मचारियों के कार्य के आकलन के लिए "परफार्मेंस इंडीकेटर" तय हों.

 शासकीय गतिविधियों की नागरिक केन्द्रित मॉनीटरिंग की व्यवस्था.

 हितग्राहीमूलक योजनाओं के क्रियान्वयन का "थर्ड पार्टी" मूल्यांकन हो.

 कानूनों तथा नियमों में "सनसैट क्लॉज" लागू किया जाए, जिससे समयावधि पश्चात उनका पुनरीक्षण हो सके.

 "आगे आएं लाभ उठाएं"  को‍ डिजिटल स्वरूप में लाया जाए. जानकारी अपलोड करने पर पात्रता की जानकारी मिल जाए.

 प्रदेश में "टेलीमेडिसन" तथा "ऑनलाइन शिक्षा सुविधा".

 "आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस", "ब्लॉक चेन", "ड्रोन", "क्लाउड" को प्रोत्साहित करने के लिए "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस".

 शासकीय कानून एवं प्रक्रियाओं का सरलीकरण हो.

 सभी अधिनियम, नियम आदि एक वेबसाइट पर उपलब्ध हों.

 IIT, IIM, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जैसी शैक्षणिक संस्थाओं, औद्योगिक संगठनों, सिविल सोसायटी के सहयोग से नियमों तथा अधिनियमों में सुधार.